उत्तराखंड में बड़ा साइबर हमला: चीन के ‘बहरूपिया वायरस’ ने डेटा सेंटर में लगाई सेंध

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी डेटा सेंटर पर एक बार फिर गंभीर साइबर हमला हुआ है। प्रारंभिक जांच में चीन के एक बड़े हैकर ग्रुप का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है, जिसने ‘बहरूपिया वायरस’ के जरिए राज्य के संवेदनशील डेटा में सेंध लगाई है। इस हमले के बाद खाद्य आपूर्ति, जीएसटी और पर्यटन विभाग जैसे आम जन-जीवन से सीधे जुड़े विभागों की सुरक्षा को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा सेंटर में दाखिल हुआ यह ‘बहरूपिया वायरस’ बेहद चालाक और खतरनाक है। सिस्टम में प्रवेश करते ही यह खुद को असली सिस्टम फाइल के रूप में बदल लेता है। जैसे ही कोई यूजर इस फाइल पर क्लिक करता है, यह एक्टिव होकर डेटा में सेंधमारी शुरू कर देता है। इस तरह के वायरस का इस्तेमाल भारत और वियतनाम में डेटा चोरी के लिए किया जाता रहा है।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड कैबिनेट के 26 बड़े फैसले: खिलाड़ियों को मुफ्त बस यात्रा, दिव्यांग छात्रों को पासिंग मार्क्स में 5% छूट

उल्लेखनीय है कि साल 2024 में भी इसी डेटा सेंटर पर ‘माकोप रैनसमवेयर’ का बड़ा हमला हुआ था, तब हैकर्स ने पूरे डेटा को लॉक करके फिरौती मांगी थी। उस संकट से उबरकर डेटा सेंटर अभी पूरी तरह संभल भी नहीं पाया था कि अब इस नए चीनी वायरस ने आईटी विभाग की नींद उड़ा दी है।

वायरस के ट्रेंड को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि चीनी हैकर्स ने नागरिकों से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा कॉपी कर लिया है। इस हमले से खाद्य आपूर्ति विभाग का राशन कार्ड व डीबीटी डेटा, राज्य कर का पूरा वित्तीय ब्योरा और पर्यटन विभाग में नागरिकों के पंजीकरण से जुड़ा डेटा सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है।

यह भी पढ़ें -  रोडवेज कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार: देहरादून समेत पूरे उत्तराखंड में बस सेवाएं ठप, हजारों यात्री परेशान

हालांकि, राहत की बात यह है कि हैकर्स की तरफ से अभी तक किसी प्रकार की फिरौती या वित्तीय मांग का संदेश नहीं आया है। वहीं, इस संवेदनशील मामले पर सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी के अधिकारी फिलहाल आधिकारिक तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और आंतरिक जांच में जुटे हैं।

इस घटना के बाद डेटा सेंटर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है। जांच में सामने आया है कि जिस समय यह साइबर हमला हुआ, उस वक्त डेटा सेंटर का फायरवॉल बंद पड़ा था क्योंकि उसकी मियाद खत्म हो चुकी थी। समय रहते फायरवॉल को रिन्यू न करना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

यह भी पढ़ें -  'अंकिता से लेकर अंकित हत्याकांड तक, कई राज दफ़न है मेरे सीने में'- उर्मिला सनावर

इसके अलावा, डेटा सेंटर की सुरक्षा के लिए पूर्व में खरीदे गए महंगे साइबर टूल्स का इस्तेमाल न किए जाने पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुरक्षा उपकरण मौजूद होने के बावजूद उनका इस्तेमाल न होना और फायरवॉल का एक्सपायर रहना पूरी डिजिटल सुरक्षा प्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है।

फिलहाल तकनीकी विशेषज्ञों की टीम वायरस के असर को बेअसर करने और डेटा को सुरक्षित करने की कोशिश कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हैकर्स डेटा चोरी करने में सफल रहे हैं या केवल सिस्टम तक ही पहुंच पाए थे। पूरे प्रदेश के सरकारी आईटी ढांचे को हाई अलर्ट पर रखा गया है।