उत्तराखंड में ‘मियां’ शब्द पर सियासी संग्राम: कांग्रेस के विरोध पर BJP का पलटवार, तुष्टीकरण का लगाया आरोप

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में ‘मियां’ शब्द को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा इस शब्द पर आपत्ति जताए जाने के बाद भाजपा ने विपक्ष पर तीखा पलटवार किया है। भाजपा ने इस विरोध को सीधे तौर पर तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए समान नागरिक संहिता, धर्मांतरण और लव जिहाद जैसे मुद्दों पर कांग्रेस को पूरी तरह घेर लिया है।

भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक बयानबाजी तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। पार्टी ‘मियां’ विवाद को एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में जनता के बीच ले जा रही है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि कांग्रेस की इस आपत्ति से उसकी राजनीतिक असहजता और तुष्टीकरण का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड साफ उजागर हो रहा है।

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राजनीतिक हमले को और तेज करते हुए भाजपा ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हुए भर्ती घोटालों और भूमि विवादों की फाइलें भी दोबारा खोल दी हैं। सत्ताधारी दल का कहना है कि जिन घोटालों की जड़ें कांग्रेस शासनकाल से जुड़ी हैं, उन पर आज विपक्ष अपनी नैतिक जवाबदेही से किसी भी सूरत में बच नहीं सकता।

वहीं यूआईआईडीबी को सात हजार बीघा जमीन देने के कांग्रेस के आरोपों पर भी भाजपा ने करारा जवाब दिया है। पार्टी ने सात हजार बीघा जमीन देने के दावे को पूरी तरह झूठा करार देते हुए साफ किया कि केवल 45 एकड़ भूमि ही दी गई है। भाजपा ने इसे राज्य में निवेश और नए रोजगार पैदा करने की पारदर्शी प्रक्रिया बताया है।

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भाजपा का कहना है कि उत्तराखंड में पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़े पूंजी निवेश की सख्त जरूरत है। विपक्ष के जमीन से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा इस मुद्दे को प्रदेश के विकास और युवाओं के रोजगार की बहस में बदलने की कोशिश कर रही है।

चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस जहां सरकार के फैसलों पर सवाल उठाकर सत्ता पक्ष की घेराबंदी करने में जुटी है, वहीं भाजपा हर नए आरोप के जवाब में कांग्रेस के अतीत और उसके शासनकाल के विवादों को सामने रख रही है। इस रणनीति से साफ है कि आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक मुकाबला और तीखा होने वाला है।

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‘मियां’ शब्द विवाद, जमीन के आरोप और पुराने भ्रष्टाचार के मुद्दों को एक ही राजनीतिक फ्रेमवर्क में रखकर भाजपा ने विपक्ष पर चौतरफा हमला बोल दिया है। अब चुनावी लड़ाई सिर्फ मौजूदा सरकार के कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्ष से भी उसके पुराने राजनीतिक फैसलों का हिसाब मांगा जा रहा है।