देहरादून। उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को महंगी बिजली से निजात दिलाने के लिए ऊर्जा विभाग ने एक दीर्घकालिक और ठोस प्लानिंग पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत शाम पांच बजे से लेकर सुबह छह बजे तक के पीक ऑवर्स में उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मुहैया कराने की तैयारी है। जब बाजार में बिजली सबसे अधिक महंगी होती है, उस वक्त राज्य सरकार अपने संसाधनों के जरिए किफायती बिजली का उत्पादन करेगी।
इस योजना का मुख्य फोकस पीक डिमांड के समय आम जनता को राहत देना है। वर्तमान में पीक ऑवर्स के दौरान 12 रुपये प्रति यूनिट तक चुकानी पड़ने वाली महंगी बिजली के मुकाबले, राज्य सरकार अपने संसाधनों से मात्र पांच से छह रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली तैयार करने में जुटी है।
प्रमुख सचिव ऊर्जा आर. मीनाक्षी सुंदरम ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए कई मोर्चों पर एकसाथ काम किया जा रहा है। मुख्य जोर इस बात पर है कि बाजार में जब दाम आसमान छू रहे हों, तब राज्य के अपने थर्मल और पंप स्टोरेज पावर प्लांट के जरिए सस्ती बिजली का विकल्प मौजूद रहे।
इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य में 1320 मेगावाट के थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर पहले ही काम शुरू हो चुका है। वहीं दूसरे चरण के तहत 600 मेगावाट क्षमता वाले इच्छाड़ी और 500 मेगावाट के सॉंग बांध पंप स्टोरेज पावर प्लांट के जरिए बिजली उत्पादन किया जाएगा।
पंप स्टोरेज प्लांट की कार्यप्रणाली बेहद अनूठी होगी, जिसमें दिन के वक्त जब बाजार में बिजली सस्ती होती है, तब पानी को भविष्य के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित कर लिया जाता है। दिन के समय मुख्य रूप से सोलर पावर का उपयोग होगा, जबकि रात के महंगे वक्त में इसी आरक्षित पानी से बिजली पैदा कर भारी खर्च से बचा जाएगा।
इन प्रमुख परियोजनाओं के अतिरिक्त ऊर्जा विभाग द्वारा न्यूक्लियर पावर, जियो थर्मल और हाइड्रोजन पावर जैसे अन्य वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इन सभी प्रयासों से आने वाले दिनों में उत्तराखंड बिजली के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।

