उत्तरकाशी जिले के मोरी ब्लॉक में सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। मुख्य शिक्षाधिकारी अमित कोटियाल ने औचक निरीक्षण के दौरान पाया कि ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत स्कूलों को दी गई धनराशि का सही इस्तेमाल नहीं किया गया है। बजट का गबन करने और प्रशासनिक लापरवाही बरतने के आरोप में प्राथमिक विद्यालय दौणी और सट्टा के दो प्रभारी प्रधानाध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। शिक्षा विभाग की इस सख्त कार्रवाई से पूरे क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया है।
पुराने कमरों को नया दिखाकर बजट हड़पने का आरोप
निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि स्कूलों में रसोई घर और नए निर्माण कार्य के लिए बजट जारी किया गया था। लेकिन नया निर्माण कराने के बजाय, पुराने कमरों की दीवारों को ही घिसकर और रंग-रोगन करके नया रूप देने की कोशिश की गई। इसे सरकारी धनराशि का खुला गबन मानते हुए विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है।
निरीक्षण के दौरान अनुपस्थित और जनसुनवाई से दूरी
कार्यवाही की एक बड़ी वजह ड्यूटी के प्रति लापरवाही भी रही। दौणी स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक संतोष कुमार बिना किसी सूचना के स्कूल से गायब मिले, वहीं सट्टा स्कूल के प्रभारी हरीश चंद्र जनसुनवाई शिविर में अनुपस्थित रहे। इसके अलावा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय ठडियार में कार्यरत एक शिक्षामित्र से भी बिना उचित प्रक्रिया के स्कूल छोड़ने पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत दी गई थी धनराशि
मुख्य शिक्षाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा स्कूलों में रंगाई-पुताई, रसोई घर और गार्डन निर्माण जैसे कार्यों के लिए फंड दिया जाता है ताकि बच्चों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकें। लेकिन इन विद्यालयों ने धन का सदुपयोग करने के बजाय अनियमितताएं बरतीं, जिसके कारण यह निलंबन की कार्रवाई की गई है।

