देहरादून। भारी-भरकम चालानों के बोझ से परेशान उत्तराखंड के वाहन स्वामियों के लिए राहत भरी खबर है। देहरादून में परिवहन विभाग पुराने लंबित चालानों के एकमुश्त निस्तारण के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ योजना लाने की तैयारी में जुट गया है। इस योजना के लागू होने से वाहन मालिक छूट के साथ कम रकम चुकाकर अपने वर्षों पुराने चालानों का निपटारा कर सकेंगे।
उत्तराखंड में हर साल एक लाख से ज्यादा चालान कटते हैं, जिनमें एएनपीआर कैमरों से होने वाले ऑटोमैटिक चालानों की संख्या सबसे अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 70 प्रतिशत एएनपीआर चालान जमा ही नहीं हो पाते, जिससे बकाये की रकम लगातार बढ़ती जा रही है।
कई गाड़ियों पर तो लगातार नियम तोड़ने की वजह से 30 से भी ज्यादा चालान दर्ज हो चुके हैं। भारी जुर्माने के डर से लोग रकम जमा नहीं कर पा रहे हैं, जिससे विभाग का करोड़ों रुपये का राजस्व फंसा हुआ है। परिवहन विभाग अब वाहन मालिकों को आर्थिक राहत देने के साथ इस फंसे हुए राजस्व की वसूली का रास्ता निकाल रहा है।
योजना के तहत 1 जनवरी 2026 से पहले कटे चालानों को शामिल करने का प्रस्ताव है। ओटीएस लागू होने के बाद पेनल्टी राशि में बड़ी छूट मिलेगी। इसके अलावा लंबे समय से चालान न भरने के कारण ब्लैकलिस्ट या ब्लॉक किए गए वाहनों का रिकॉर्ड भी पूरी तरह साफ हो जाएगा।
चालानों का निस्तारण होने से वाहनों की फिटनेस, एनओसी और ट्रांसफर में आ रही प्रशासनिक अड़चनें भी दूर होंगी। विभाग को उम्मीद है कि इस सेटलमेंट योजना से लंबित चालानों के रूप में फंसा करोड़ों रुपये का सरकारी राजस्व भी खजाने में वापस आ जाएगा।
ओटीएस योजना का खाका तैयार करने के लिए परिवहन सचिव के निर्देश पर काम जारी है। आरटीओ देहरादून संदीप सैनी के अनुसार, विशेष समिति उत्तर प्रदेश और दिल्ली समेत अन्य राज्यों में लागू ओटीएस मॉडल का अध्ययन कर ड्राफ्ट तैयार कर रही है, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।

