..”तो भगवान मुझ जैसा गरीब उत्तराखंड के हर भाई-बहन को बना दे”- हरीश रावत

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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में ‘गरीब’ शब्द को लेकर जारी जुबानी जंग के बीच एक वरिष्ठ नेता ने अपने विरोधियों पर तीखा पलटवार किया है। पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे नेता ने कहा कि उनके बीमार होने का फायदा उठाकर विरोधी राजनीतिक अवसरवादिता साध रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि वे गरीब नहीं हैं और उनकी मासिक आय 1 लाख रुपये से अधिक है, ऐसे में उनका उपहास उड़ाने वालों की बुद्धि पर तरस आता है।

हाल ही में एक पॉडकास्ट में ‘गरीब’ कहे जाने और उसके बाद उड़ाए गए उपहास पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी खुद को गरीब नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यदि वे गरीब हैं, तो ईश्वर उत्तराखंड के हर भाई-बहन को उनके जितना ही समृद्ध और सक्षम बनाए।

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अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे एक आम और संघर्षशील उत्तराखंडी परिवार से आते हैं। मां से मिले संघर्ष के संस्कारों और जनता के आशीर्वाद से उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि वे बैंक से कर्ज लेकर अपने लिए मकान बना रहे हैं और जल्द ही अपने घर वाले हो जाएंगे।

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विरोधियों द्वारा गरीबी का मजाक उड़ाए जाने पर उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में आज भी वास्तविक गरीबी है, जिससे हम सभी को मिलकर लड़ना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उपहास उड़ाने वाले वही लोग हैं, जिनकी गरीबी खुद उत्तराखंड राज्य बनने के बाद दूर हुई है।

राजनीतिक प्रतिद्वंदियों पर बड़ा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय जो लोग केवल एक होल्डॉल और टिन का बक्सा लेकर आए थे, आज उनके पास घोषित रूप से करोड़ों-करोड़ों की संपत्ति है। ऐसे लोगों को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने अतीत को देखना चाहिए।

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अपनी सार्वजनिक शुचिता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव के समय दाखिल किए गए हलफनामे में उनकी अर्जित संपत्ति का पूरा ब्योरा दर्ज है। कोई भी व्यक्ति इसे देखकर सच्चाई जान सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों की संपत्ति का यह अंतर सार्वजनिक जीवन की स्वच्छता, नैतिक मूल्यों और व्यक्ति के चरित्र को पूरी तरह से स्पष्ट कर देता है।