Uttarakhand: शहीदों को नमन, धामी का प्रण, हर शहीद के गांव में लगेगी वीर सैनिक की प्रतिमा

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देहरादून। शहीदों की चिताओं पर लगेगें हर बरस मेले वतन पर मिटने वालों का यहीं बांकी निशां होगा…इस बात को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बखूबी समझते हैं। दरअसल खुद सीएम धामी सैनिक पुत्र है,लिहाजा वो जानते हैं कि जो सैनिक मुल्क की सरहद की हिफाजत करने के लिए मुस्तैद होता है उसके घर का चूल्हा हर सांझ कैसे जलता है सुबह कैसे सुलगता है।

भगवान शंकर की धरती माने जाने वाला उत्तराखंड देव भूमि तो है ही वीर भूमि भी है यहा हर गांव में शिवालय हैं तो गांव के तकरीबन हर परिवार में कोई न कोई फौजी जरूर है। जो सरहद की हिफाजत कर रहा है या कर चुका है या फिर ऐसा रणबांकुरा भी है जिसने मां भारती की ओर देखने वाली हर नापाक नजर को मुहंतोड़ जवाब दिया, धड़कते जिस्म की आखरी सांस और लहू का आखरी कतरा मुल्क के नाम करते हुए खुद को भी फना कर दिया है।

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भारत माता को अर्पित कर दिया ये कहते हुए कि तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें..बेशक भारत माता के उन सपूतों ने खुद को न्यौछावर कर दिया, उन्होने अपने आज को हमारे कल के बेझिझक समर्पित किया ताकि भारत माता की संताने सलामत रहें। लेकिन आज से पहले उन सैनिकों की शहादत के बारे में किसी भी सरकार ने ऐसा नहीं सोचा. जैसा धामी राज में सोचा जा रहा है. सैनिको की शहादत को अमर रखने का ड्राफ्ट तैयर किया गया है।

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सीएम धामी जानते हैं कि उत्तराखंड की वीर भूमि में भारत माता के वैभव के लिए खुद को समर्पित करने वाले शहीद सैनिक को भगवान माना जाता है। उसके कुछ प्रतीक स्थापित किए जाते हैं उन्हे पूजा जाता है। क्योकि ये उत्तराखंड देवभूमि है तो वीरभूमि भी है। यहां देवता निवास करते हैं तो वीर पैदा भी होते हैं। ऐसे वीरों की शहादतों के सच्चे किस्से नई पीढ़ी की रगों में बहते लहू को गर्म रखते हैं तो सरहद की हिफाजत का मोल भी बताते हैं..उनकी शहादत का रंग हमेशा बसंती बना रहे कभी फीका न पड़े।

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं, जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्। तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय, युद्धाय कृतनिश्चयः बेशक गीता का ये श्लोक मुल्क की हिफाजत के लिए सरहद पर तैनात भारत मां के वीर सपूत को मां भारती के वैभव के लिए अपने आपको न्यौछावर करने के लिए प्रेरित करता है।

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ऐसे में उत्तराखंड की धामी सरकार ने एक सहासिक फैसला लेते हुए तय किया है कि भारत माता के हर उस वीर सपूत की प्रतिमा उनके गांव में स्थापित की जाएगी..ताकि आने वाली पीढ़ी शहादत की अमर दास्तान को भुला न सके, उनकी वीरता के किस्से उनकी तरह अमर रहें।

धामी सरकार के इस फैसले की पूर्व सैनिक हों या आम आदमी सभी तारीफ कर रहे हैं। यही फैसले तो धामी को दूसरे मुख्यमंत्रियों से अलग साबित करते हैं। तय है कि आने वाले वक्त में कहा जाएगा सीएम तो कई देखे लेकिन धामी जैसा सीएम नहीं देखा।

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