सब कुछ शहरी विकास विभाग के प्लान के मुताबिक हुआ तो आने वाले वक्त में राज्य के सभी 108 नगर निकाय साफ-सफाई के मोर्चे पर चकाचक मिलेंगे। दरअसल राज्य के मैदानी इलाके के शहरी निकाय हों या पहाड़ी इलाकों के साफ-सफाई के पुख्ता इंतजामात के लिए भारी भरकम रकम चाहिए।
सिर्फ डोर-टू-डोर कचरा क्लक्शन के मासिक शुल्क से सुरसा के मुंह जैसे कचरे का प्रबंधन नही हो सकता। गौरतलब है कि राज्य में मौजूदा वक्त में हर दिन 2100 टन से ज्यादा ठोस कचरा निकलता है। जिसका निस्तारण एक बड़ी चुनौती है अभी तक देखा जा रहा है कि सूखे कचरे को डंपिग जोन में इकट्ठा किया जाता है।
राज्य में तकरीबन 60 से ज्यादा डंपिग साइट बनाई हुई हैं जहां 23 लाख मैट्रिक टन से ज्यादा पुराना कचरा लगातार पहाड़ की शक्ल अख्तियार कर रहा है। तय है कि अगर इस ठोस कचरे के निस्तारण के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाएगा तो ये आने वाले कल के लिए एक चुनौती नहीं मुसीबत बन जाएगा।
ऐसे में उत्तराखंड शहरी विकास मंत्रालय ने ठोस कचरे के निपटारे के लिए एक मसौदा तैयार किया है। जिसके तहत शराब की हर बोतल पर एक रुपए सेस (उपकर) लगाने का प्लान है। शराब से हासिल उपकर से शहरी निकायों में ठोस कचरे का सलीके से निस्तारण किया जाएगा।
शहरी विकास मंत्रालय की ओर से कचरा प्रबंधन के लिए शराब पर सेस का ड्राफ्ट तैयार है। अब इसे मुख्य सचिव के सामने फाइनल करने के लिए रखा जाएगा और उसके बाद कंप्लीट तैयार मसौदे को कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। जहां से ओके होने के बाद नगर निकाय को भी शराब की बोतल से मदद मिलनी शुरू हो जाएगी।
आपको बता दें कि शराब की बोतल से ‘सेस’ के जरिए अभी तक तीन रुपए वसूले जा रहे हैं जिनमें एक-एक रुपया गो सेवा के लिए दिया जाता है तो एक रूपए खेल विभाग को और एक रुपया महिला कल्याण को दिया जाता हैं। अब चौथा रुपया कचरा प्रबंधन के लिए भी मिल सकता है।

