धामी कैबिनेट में शामिल नए मंत्रियों को कुर्सी मिल गई, दफ्तर मिल गया, कामकाज होने लगा लेकिन आशियाने को लेकर पशोपेश कायम है। कुछ को मिल गया लेकिन कुछ को मिलना बाकी है। जिनको नहीं मिला उनकी टेंशन दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। विधायक हास्टल में बेमन से रात काट रहे मंत्रियों को यमुना कालोनी में बने मंत्री आवासों में दिन-रात गुजारने की बेसब्री है । लेकिन जिन्होने यमुना कालोनी में बिना इजाजत के जबरन गृह प्रवेश कर दिया वो भी टेंशन फ्री नहीं है, क्योंकि उनके पास राज्य संपत्ति विभाग की इजाजत ही नहीं है। तय है कि जिस दिन राज्य संपत्ति विभाग हरकत में आया और उसने अपने नियम कायदों पर अमल किया तो तय है दाखिल हुए माननीयो को वापस विधायक हॉस्टल में रात गुजराने को भी तब तक मजबूर होना पड़ सकता है। जब तक महकमे से गृह प्रवेश का फरमान नहीं आता। ऐसे में मांननीयों की धड़कने तेज ही हैं। बेशक उन्होने अपने हिसाब से मंत्री आवास में गृह प्रवेश कर वास्तु तक बदल लिया हो लेकिन बेदखली की तलवार लटकी हुई है। बहरहाल दून की फिजा में
खबर है कि यमुना कॉलोनी के आर टू के लिए सबसे ज्यादा खींचतान मची हुई है। हालांकि परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा इस में गृह प्रवेश कर चुके हैं। लेकिन उनके हाथ में भी कोई वैधानिक कागज नही है।.,बहरहाल जो मंत्री सरकारी आवास में पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद भी दाखिल नहीं हो पाए है उनको अपने रुतबे की चिंता सता रही है। उन्हें इंतजार है उस निमंत्रण पत्र का जिसने राज्य संपत्ति महकमे की दहलीज को लांघ कर आना है। लेकिन निमंत्रण है कि आने को तैयार नहीं। केबिनेट मंत्री खजान दास तो इतने नाराज हैं कि उन्हें लगता है कि उनकी फाइल कही नागलोग में गुम हो गई है। हालांकि लोग हैं कि सरकार की कड़ियों और सिस्टम की मकड़ियो को लेकर खूब चटकाऱे ले रहे हैं।

