उत्तराखंड में आगामी चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी के आठ विधायकों की उम्मीदवारी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। पार्टी द्वारा कराए गए दो आंतरिक सर्वेक्षणों की कसौटी पर ये विधायक खरे नहीं उतर पाए हैं, जिसके बाद संगठन ने उन्हें सख्त लहजे में धरातल पर काम करने और जनता से किए वादे पूरे करने की नसीहत दी है। भाजपा इस बार तीसरी बार सरकार बनाने के लक्ष्य में कोई भी चूक नहीं करना चाहती है और वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, जिन सीटों पर हार का खतरा नजर आ रहा है, वहां संगठन बेहद गंभीर रुख अपना रहा है।
प्रदर्शन में सुधार न होने पर कटेगा टिकट
सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई है कि इन आठ विधायकों ने जनता से जो वादे किए थे, वे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं और धरातल पर उनकी सक्रियता भी उम्मीद से काफी कम पाई गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने साफ कर दिया है कि पार्टी के लिए केवल जिताऊ उम्मीदवार ही प्राथमिकता हैं और इसी नजरिए से सभी सीटों का आकलन किया जा रहा है। यदि आने वाले समय में इन विधायकों ने अपने प्रदर्शन और कार्यशैली में सुधार नहीं किया, तो पार्टी अगले चुनाव में उनका टिकट काटने से बिल्कुल भी परहेज नहीं करेगी।
पिछले चुनाव के नुकसान से लिया सबक
भाजपा संगठन पिछले चुनाव में हुए 10 सीटों के नुकसान को ध्यान में रखते हुए इस बार फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। साल 2017 में पार्टी के पास 57 सीटें थीं जो 2022 में घटकर 47 रह गईं और वोट शेयर में भी 2.20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। संगठन ने इस बार उन खामियों को प्राथमिकता पर रखा है और 47 के इस आंकड़े को और आगे बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है। पार्टी उन सीटों के लिए भी अलग से रणनीति बना रही है जहां पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, ताकि 10 साल की सत्ता के बाद किसी भी प्रकार की विरोधी लहर को पनपने से रोका जा सके।

