सुप्रीम कोर्ट में लंबित मुकदमों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। लेकिन न्यायधीश गितनी के हैं। मौजूदा समय में सुप्रीम कोर्ट में 34 न्यायधीश हैं इसमे मुख्य न्यायधीश भी शामिल हैं। केंद्रीय सूचना प्रसारण एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में तकरीबन 92 हजार मुकदमे लंबित हैं, मतलब हालात “ऊंट के मुंह में जीरा” वाले है। हालांकि इस सुप्रीमकोर्ट की इस तस्वीर को कुछ हद तक सुधारने की कोशिश केंद्र सरकार ने की है।
केंद्रीय केबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाकर 38 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। हालांकि इससे भी बहुत ज्यादा हालात नहीं सुधरेंगे लेकिन कहते हैं something better nothing मतलब ‘’न मामा से अच्छा काना मामा”
ये इसलिए कह रहे हैं कि अगर सुप्रीम कोर्ट पूरे साल फिलहाल लंबित मुकद्दमो पर ही सुनवाई करे और रविवार की छुट्टी के अलावा कोई छुट्टी न हो तो लगभग 295 मुकद्दमों की सुनवाई हर दिन करनी होगी। जो कि संभव ही नहीं है।
वो इसलिए संभव नहीं लगता कि नए जजो के बाद सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश समेत जजो की संख्या 38 हो जाएगी। यानि अगर हर दिन हर माननीय न्यायधीश की अदालत लगे तो लगभग 7- 8 मुकद्दमे सुनवाई के लिए आएंगे। मतलब अगर माननीय न्यायधीश लगातार आठ घंटे मामले सुने तो एक घंटे के भीतर ही सुनवाई और फैसले करने होंगे। जो न्याय जैसी महान व्यवस्था में किसी भी सूरते हालात में मुमकिन ही नहीं है।
मतलब साफ है कि अभी और गुंजाइश है। बहरहाल अभी सिर्फ कैबिनेट ने मंजूरी दी है. संसद में प्रस्ताव पास होना बाकी है। हालांकि माना जा रहा है कि संसद में भी न्यायधीशों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव आसानी से पास हो जाएगा। आपको बता दें कि जब सुप्रीम कोर्ट (जजो की संख्या) अधिनियम 1956 बना था तब उसमें मुख्य न्यायधीश को छोड़कर शेष जजों की संख्या 10 तय की गई थी। हालाकिं बाद में संसोधन होते रहे और सुप्रीम कोर्ट में जजों की तादाद में इजाफा होता रहा और मौजूदा वक्त में सुप्रीमकोर्ट में 34 न्यायधीश हैं। इनमें माननीय मुख्य न्यायधीश भी शामिल हैं।

