कुंभ के वास्तविक आयोजक संत हैं,सरकार तो सिर्फ सहयोगी है- सीएम धामी

ख़बर शेयर करें

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी यूं नहीं दिलों मे बसते. सत्ता का गलियारा हो या संतों का समागम सीएम धामी अपनी छाप हर जगह छोड़ कर आते हैं.. ये बात इसलिए कही जा रही है कि सीएम धामी ने धर्मनगरी हरिद्वार में वो बात कही जिसे सुनकर समझकर संत समुदाय गदगद हो गया। सीएम धामी ने कहा,” कुंभ के असली आयोजक तो संत ही हैं. सरकार तो संतों की सहयोगी है।संतों के बिना इस तरह का आध्यात्मिक महोत्सव पूर्णता को प्राप्त नहीं कर सकता।”

यह भी पढ़ें -  Uttarakhand: ट्रैफिक जाम से मुक्ति पाने के लिए 4 साल में बिछा पार्किंग नेटवर्क, बनीं 63 पार्किंग

दरअसल हरिद्वार में 2027 के अर्धकुंभ मेले को लेकर जोरदार तैयारी चल रही है। ऐसे में सीएम धामी कुंभ के आयोजन को लेकर बेहद संजीदा हैं..कहीं कोई चूक न रह जाए इसको लेकर वे आए दिन कुंभ निर्माण के कामों की समीक्षा कर रहे हैं और हरिद्वार का स्थलीय दौरा भी कर रहे हैं और संत समाज के साथ लगातार संवाद भी कर रहे हैं।

हरिद्वार में वर्ष 2027 में होने वाले महाकुंभ को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। सरकार ने कुंभ से जुड़े विकास कार्यों को रफ्तार देने के साथ ही निर्माण कार्यों की निगरानी भी बढ़ा दी है। कुंभ के लिए अब तक करीब 700 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि करीब 140 घाटों के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण का काम शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार हरिद्वार का दौरा कर तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं और संत समाज के साथ भी लगातार संवाद और समन्वय स्थापित कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड: भू-माफिया-जमीन फर्जीवाड़े पर CM धामी का 'धाकड़' एक्शन, दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश

सीएम धामी ने कहा कि कुंभ केवल एक आयोजन नहीं बल्कि पूरी दुनिया की आध्यात्मिक चेतना का महोत्सव है। उन्होंने साफ कहा कि कुंभ के मुख्य आयोजक संत ही होते हैं और सरकार की भूमिका सिर्फ सहयोगी की है।ऐसे में सरकार की कोशिश है कि कुंभ की तैयारियां समय से पूरी हों और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सीएम ने कहा कि संतों के साथ सरकार पहले भी बैठक और संवाद कर चुकी है और आगे भी लगातार समन्वय बनाए रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड में समर्थ पोर्टल और CUET का विरोध: निजी कॉलेज एसोसिएशन ने की व्यवस्था खत्म करने की मांग