टिहरी श्रम विभाग में औचक छापेमारी: श्रमिक कार्ड और प्रमाण पत्र के नाम पर अवैध वसूली का पर्दाफाश

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टिहरी। उत्तराखंड के टिहरी स्थित श्रम विभाग कार्यालय में श्रमिकों से कार्य प्रमाण पत्र और श्रमिक कार्ड बनाने के नाम पर अतिरिक्त धनराशि वसूले जाने की शिकायतों का संज्ञान लेते हुए श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने औचक छापेमारी की है। इस कार्रवाई के दौरान दफ्तर में मौजूद श्रमिकों से पूछताछ की गई और उनके दस्तावेजों की गहन जांच की गई, जिसमें श्रमिकों ने खुलासा किया कि 90 दिन के कार्य प्रमाण पत्र के लिए 300 से 400 रुपये और श्रमिक कार्ड बनाने के लिए करीब 600 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।

छापेमारी के दौरान श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने श्रमिकों के पास मौजूद कार्य प्रमाण पत्रों की बारीकी से जांच की। कुछ प्रमाण पत्रों पर संबंधित ठेकेदार का नाम अंकित मिलने पर अधिकारी ने तत्काल फोन पर ठेकेदार से संपर्क किया। ठेकेदार ने स्पष्ट किया कि उसने ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी नहीं किया है और बाद में इस संबंध में लिखित बयान भी विभाग को सौंपा। वहीं, पूछताछ में पीड़ित महिलाएं यह नहीं बता सकीं कि उन्हें यह प्रमाण पत्र किसने दिया; उनका कहना था कि कोई अज्ञात व्यक्ति आकर उन्हें यह दस्तावेज दे गया था।

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श्रम प्रवर्तन अधिकारी आइशा ने बताया कि लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह औचक जांच की गई थी। जांच के दौरान फर्जी कार्य प्रमाण पत्र और बिचौलियों द्वारा अवैध वसूली की बात उजागर हुई है। पूछताछ में एक महिला श्रमिक ने यह भी बताया कि उसने काम के सिलसिले में गांव के प्रधान को पैसे दिए थे, हालांकि वह स्पष्ट कारण नहीं बता सकी। अधिकारी ने कहा कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रम विभाग ने श्रमिक कार्ड और योजनाओं के लिए निर्धारित आधिकारिक शुल्क सार्वजनिक किया है। नए पंजीकरण की विभागीय फीस ₹100 तय है, जबकि सीएससी के माध्यम से आवेदन करने पर ₹50 अतिरिक्त सेवा शुल्क लिया जाता है। श्रमिक पंजीकरण के नवीनीकरण की फीस ₹110 है, विभागीय योजनाओं का शुल्क ₹50 है, और परिवार का विवरण जोड़ने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

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श्रम विभाग की इस सख्त कार्रवाई के बाद बिचौलियों के खिलाफ जांच तेज कर दी गई है। विभाग ने सभी श्रमिकों और आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी कार्य के लिए बिचौलियों के बहकावे में न आएं और केवल निर्धारित सरकारी शुल्क का ही भुगतान करके रसीद प्राप्त करें। अधिकारियों ने साफ हिदायत दी है कि श्रमिक केवल उसी ठेकेदार का प्रमाण पत्र लगाएं जिसके अधीन उन्होंने वास्तव में कार्य किया है, और किसी भी प्रकार की रिश्वत या वसूली की स्थिति में सीधे श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

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