उत्तराखंड में एक ओर स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को और अधिक गति दी जा रही हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर इन मीटरों को लगाया जाए। वहीं आरडीएसएस योजना के तहत राज्य के सभी घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक क्षेत्रों को इस स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे न केवल बिजली की बर्बादी रुकेगी बल्कि ऊर्जा प्रबंधन भी पहले से कहीं अधिक प्रभावी होगा।
वहीं दूसरी ओर प्रदेश की जनता में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान के खिलाफ भारी आक्रोश है, क्योंकि उनका मानना है कि ये मीटर जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं। उनके विरोध प्रदर्शन के दौरान यह बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि उपभोक्ता इस नई तकनीक को अपनाने के बजाय वर्तमान व्यवस्था और विभाग की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट हैं।
स्मार्ट मीटर से जुड़े आर्थिक और तकनीकी आरोप
उत्तराखंड के रामनगर ब्लॉक के ग्राम शक्तिनगर में स्मार्ट मीटर लगाने आई बिजली विभाग की टीम को स्थानीय जनता और पूर्व विधायक रणजीत रावत के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा, जिसके कारण टीम को अपना काम बीच में ही रोकना पड़ा।। पूर्व विधायक रणजीत रावत ने विभाग पर आरोप लगाया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद से उपभोक्ताओं के बिल असामान्य रूप से बढ़कर हजारों और लाखों रुपये तक पहुँच रहे हैं, जिसे उन्होंने जनता का उत्पीड़न करार दिया है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि विभाग बिलिंग चक्र के साथ छेड़छाड़ कर रहा है, जहाँ एक साल में मिलने वाले 12 बिलों के स्थान पर अब उपभोक्ताओं को 15 बिल थमाए जा रहे हैं। इसके साथ ही फिक्स चार्ज के नाम पर होने वाली वसूली और अडानी-अंबानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने के आरोपों ने इस विरोध को और अधिक हवा दी है।
बुनियादी ढांचे के सुधार की मांग और विभागीय कार्यशैली पर सवाल
रणजीत रावत ने विभाग की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि बार-बार मीटर बदलने के बजाय विभाग को बिजली के उन जर्जर तारों और खंभों को अपग्रेड करना चाहिए जो लोगों के घरों के ऊपर से गुजर रहे हैं और सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। उन्होंने विभाग की मंशा पर संदेह जताते हुए मांग की कि तकनीकी सुधार के नाम पर केवल मीटर बदलना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करना अधिक आवश्यक है। तो वहीं, जनता का भी स्पष्ट संदेश है कि जब तक उनकी शिकायतों का निवारण नहीं होता, वे स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति नहीं देंगे।
बहरहाल, जहां एक ओर मुख्य सचिव ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह में न पड़ें और केंद्र सरकार के अनुदान के साथ उपलब्ध कराई जा रही इस आधुनिक तकनीक का पूरा लाभ उठाएं। वहीं दूसरी ओर आम जनता इसका पुरजोर विरोध कर रही है, जिसमें उन्हें विपक्ष का समर्थन भी मिलता दिखाई दे रहा है।

