नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और पंजाब के मुख्यमंत्री श्री भगवंत मान के बीच मंगलवार को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने पंजाब के कृषि परिदृश्य, किसानों के कल्याण, धान की पिसाई से जुड़ी समस्याओं और फसल विविधीकरण पर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत का सीधा असर पंजाब के लाखों किसानों, जल संसाधनों की सुरक्षा और आगामी खाद्यान्न खरीद प्रक्रिया पर पड़ेगा।
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब को भारत का अन्न भंडार बताते हुए देश की खाद्य सुरक्षा में वहां के किसानों के ऐतिहासिक योगदान की सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पंजाब की उपजाऊ भूमि, जल संसाधनों और किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि कृषि, जल संरक्षण और किसान कल्याण से जुड़ी सभी केंद्रीय परियोजनाओं में राज्य को केंद्र का पूरा सहयोग मिलेगा।
चर्चा में फसल विविधीकरण को पंजाब के सतत कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करेंगी ताकि फसल चक्र बदलने पर किसानों को कोई वित्तीय नुकसान न हो। इसके तहत केंद्र सरकार के दलहन, तिलहन, कपास और बागवानी मिशनों के जरिए पंजाब के किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य में सुधार हो सके।
उर्वरकों की उपलब्धता पर मीडिया से बात करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने स्थिति स्पष्ट की कि देश में रासायनिक खादों की कोई कमी नहीं है, लेकिन मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित इस्तेमाल जरूरी है। वहीं, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बताया कि पंजाब चालू सीजन में 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य सफलता पूर्वक हासिल कर लेगा और राष्ट्रीय अन्न भंडार को मजबूत बनाने में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।
पंजाब की अतिरिक्त वित्तीय सहायता और प्रशासनिक मांगों पर भी सकारात्मक बातचीत हुई। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि विभिन्न सिंचाई व कृषि परियोजनाओं के माध्यम से पंजाब को निरंतर सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, केंद्रीय बीज समिति में पंजाब सरकार के प्रतिनिधि को शामिल करने के प्रस्ताव पर भी केंद्र सरकार ने गंभीरता से विचार करने का भरोसा दिया।

