उत्तराखंड मेडिकल कॉलेजों में नियुक्ति के नियम बदले: अब मंत्री नहीं, सचिव देंगे संविदा भर्ती को मंजूरी

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उत्तराखंड सरकार ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर होने वाली नियुक्तियों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब इन मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों और अन्य संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री या विभागीय मंत्री से अनुमति लेने की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब विभागीय सचिव स्तर पर ही इन नियुक्तियों को मंजूरी दी जा सकेगी। सरकार के इस कदम से मेडिकल कॉलेजों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में काफी तेजी आएगी और प्रशासनिक फाइलों के उलझाव के कारण होने वाली देरी से बचा जा सकेगा।

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नियुक्ति प्रक्रिया का सरलीकरण

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, प्रदेश में संचालित पांच राजकीय मेडिकल कॉलेजों में जब भी किसी संविदा कर्मचारी का चयन कमेटी के माध्यम से किया जाता था, तो उसकी अंतिम नियुक्ति के लिए फाइल को मंत्री या मुख्यमंत्री के पास अनुमोदन के लिए भेजना पड़ता था। इस लंबी प्रक्रिया के कारण अक्सर नियुक्तियों में विलंब होता था, जिसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता था। अब कैबिनेट ने सचिव को ही चयन की अंतिम मंजूरी देने का अधिकार सौंप दिया है, जिससे यह पूरी प्रक्रिया अब पहले के मुकाबले अधिक सुगम और प्रभावी तरीके से कम समय में पूरी हो सकेगी।

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कर्मचारियों को समान वेतन की सौगात

कैबिनेट ने एक बड़ा मानवीय फैसला लेते हुए श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2009 से संविदा पर कार्यरत 277 कर्मचारियों को ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। लंबे समय से अपनी सेवाओं के बदले उचित पारिश्रमिक की मांग कर रहे इन कर्मचारियों के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है। अब उन्हें उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों के अनुरूप ही न्यायपूर्ण वेतन प्राप्त होगा, जिससे उनके आर्थिक स्तर में सुधार की उम्मीद है।