सरकारी दफ्तरों में बिजली बचाओ अभियान, कर्मचारी बन रहे “तपस्वी”….!

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देहरादून में इन दिनों सरकारी दफ्तरों में एक नया “ऊर्जा अध्याय” शुरू हो गया है। पेट्रोल-डीजल बचाने की कवायद के बाद अब बिजली बचत पर भी जोर दिया जा रहा है। शासन की मितव्ययिता नीति के तहत विभागों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि फिजूलखर्ची रोकी जाए और बिजली की खपत कम की जाए। लेकिन सरकारी महकमों में इस आदेश का असर भी अपने-अपने अंदाज में दिखाई दे रहा है। कहीं बिजली बचाने के नाम पर कर्मचारियों का पसीना निकल रहा है, तो कहीं अफसरों की गैरमौजूदगी में भी एसी ठंडी हवा फेंकते नजर आ रहे हैं।
राजधानी के कई सरकारी दफ्तरों में हालात ऐसे हैं कि ऊंची-ऊंची इमारतों में कर्मचारी बिना लिफ्ट के सीढ़ियां नापने को मजबूर हैं। ऊपर से टीन की छतों वाले दफ्तरों में एसी बंद होने से दोपहर के समय कमरों का तापमान ऐसा हो जाता है मानो सरकारी दफ्तर नहीं बल्कि भट्ठी चल रही हो। कर्मचारी दबे स्वर में सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इस तपती गर्मी में बिना एसी और पंखों के काम कैसे हो?
हालांकि शासन की मंशा साफ है कि सरकारी खर्च कम किया जाए और बिजली की बर्बादी रोकी जाए, लेकिन जमीनी तस्वीर हर विभाग में अलग-अलग दिखाई दे रही है। कुछ दफ्तरों ने इसे गंभीरता से लेते हुए तय समय पर एसी बंद करने, गैरजरूरी लाइटें बुझाने और बिजली की खपत घटाने के लिए बाकायदा मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। वहीं दूसरी तरफ कुछ सरकारी कार्यालय ऐसे भी हैं जहां अधिकारियों के कमरे उनकी गैरमौजूदगी में भी “शिमला” बने रहते हैं। एसी घंटों चलता रहता है, लाइटें जलती रहती हैं और बिजली बचत के आदेश केवल नोटिस बोर्ड तक सीमित नजर आते हैं।

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दिलचस्प बात यह है कि मितव्ययिता का सबसे ज्यादा असर निचले कर्मचारियों पर दिखाई दे रहा है। बड़े अफसरों के कमरों में सुविधा कम होने के बजाय आम कर्मचारियों के हिस्से की राहत कम होती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि कई दफ्तरों में अब कर्मचारी मजाक में कहने लगे हैं कि “सरकारी दफ्तरों में काम कम और तपस्या ज्यादा हो रही है।”
ऊर्जा बचत की यह मुहिम निश्चित तौर पर जरूरी है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या मितव्ययिता का मतलब केवल कर्मचारियों को गर्मी में झोंक देना है? यदि सरकार सच में बिजली बचत को लेकर गंभीर है तो सबसे पहले उन दफ्तरों पर लगाम लगानी होगी जहां अफसरों की गैरमौजूदगी में भी एसी और लाइटें सरकारी खजाने को ठंडा कर रही हैं।

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