जिनका दावा है कि वो मुल्क बचा लेते अफसोस कि, खुद को लुटा बैठे हैं..इसी अंदाज में ठगी का एक मामला उत्तराखंड में कांग्रेस की फजीहत करवा रहा है। चर्चा है कि कांग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को पद से हटाने के लिए सुपारी का इंतजाम किया गया है..कांग्रेस की हांडी में क्या खिचड़ी पक रही थी,,उसके कच्चे पक्के चावल दिखाने के लिए भावना पांडे नाम की चर्चित महिला ने दून में एक पीसी की।
पीसी के दौरान उन्होने एक ऐसे ठग का जिक्र किया जिसने अपने आपको राहुल गांधी का पीए बताया जबकि उत्तराखंड आने का मकसद, जिताऊ कांग्रेसी नेताओं का रिपोर्ट कार्ड तैयार करना बताया। ताकि कांग्रेस आलाकमान को असल हालात से वाकिफ कराया जा सके। बहरहाल भावना पांडे की माने तो वो राहुल गांधी के फर्जी पीए को पच्चीस लाख का भुगतान कर चुकी हैं। भावना पांडे की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
बहरहाल पीसी में जब पांडे सवाल किया गया कि आपने इतनी बड़ी रकम बिना जांच पड़ताल के क्यों दिए तो उनका कहना है कि फर्जी पीए ने उन्हें कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय बड़े नेताओं की हाट लाइन पर बातें सुनाई लिहाजा उन्हें फर्जी पीए की बात पर भरोसा करना पड़ा। ठग की पड़ताल तो सूबे की पुलिस कर लेगी क्योंकि राहुल गांधी का फर्जी पीए दून पुलिस की हिरासत में है।
लेकिन असल सवाल ये है कि अगर टिकट की हसरत में भावना पांडे ने पैसे दिए तो वो कांग्रेस की सदस्य भी नहीं है और यदि गणेश गोदियाल को पद से हटाने जैसा कुछ था तो ये और भी बड़ी बात है। जो महिला पार्टी की सदस्य नहीं उसका गणेश गोदियाल के पद पर रहने और न रहने से क्या लेना देना। सवाल ये भी है कि अगर वाकई में कांग्रेसी गोदियाल को पचा नहीं पा रहे हैं तो इस महिला के कांधे पर बंदूक रखने का क्या मतलब है। और जो बंदूक रखी गई है उसका ट्रिगर कौन दबाना चाहता है।
पत्रकार सवाल पूछते हैं तो भावना पांडे का शक है कि फर्जी पीए के साथ यहीं के लोग हैं वरना वो किसी भी नेता के बारे में बहुत कुछ कैसे बता देता है उसके पास कहां से पर्सनल जानकारी आती है। भावना का मानना है कि जांच होनी चाहिए। उधर प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि फर्जी पीए ने उन्हें भी लूटने के कोशिश की थी। उन पर कई ऐसे आरोप लगाए जिनसे उनका कोई वास्ता नहीं है। जिन्हे सुनकर वो कई रात सो नही पाए जबकि उनके परिजन बेचैन रहे। लिहाजा गोदियाल भी मामले की पूरी जांच पड़ताल की पैरवी कर रहे हैं।
सवाल ये है कि अगर भावना को मोहरा बनाया गया तो वो कांग्रेसी कौन हैं और अगर भावना ने टिकट की हसरत से पैसे दिए तो सवाल ये है कि जो नेता टिकट लेकर रहनुमा बनेगे वो पहले जनता की हिमायत करेंगे या अपने खर्च किए पैसे को वसूलेंगे। सवाल बहुत से हैं लिहाजा मामला दून से लेकर दिल्ली तक के कांग्रेसी कार्यालयों में हॉट टॉपिक बना हुआ है जबकि चौक चौराहों से लेकर सोशल मीडिया में सुर्खियां बटोर रहा है।
सवाल ये भी है कि अगर प्रदेश स्तर के नेताओं को अपने आला कमान के कामकाजी कल्चर उनके मिज़ाज और स्टाफ के बारे मे पता नहीं तो फिर पार्टी के भीतर कैसा अनुशासन और कैसा लोकतंत्र है। सवाल ये भी है कि क्या वाकई में कांग्रेस पैसों में टिकट बांटती है अगर नहीं तो ठगी की ये वारदात क्यो हुई और अगर सच में टिकट बिकता है तो फिर सोचिए हम कैसे लोकतंत्र में जी रहे हैं और संविधान की कसम आए दिन क्यों खा रहे हैं। बाबा साहब की आत्मा क्या सोचती होगी।

