उत्तराखंड से शुरू हुई समान नागरिक संहिता की लहर अब असम और पश्चिम बंगाल तक पहुँच गई है। भाजपा ने इन दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए अपने संकल्प पत्र में UCC लागू करने का वादा किया है। उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जिसने आजादी के बाद इस कानून को धरातल पर उतारा है, और अब इसी मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाने की तैयारी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस वादे ने मतदाताओं पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे भाजपा के हौसले बुलंद हैं।
असम और बंगाल में UCC का वादा
भाजपा ने असम और पश्चिम बंगाल के चुनावों के दौरान अपने घोषणा पत्र में समान नागरिक संहिता को शामिल किया है। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री धामी द्वारा इसे सफलतापूर्वक लागू किए जाने के बाद, अब पार्टी इसे अन्य राज्यों में भी एक प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में देख रही है। गुजरात विधानसभा भी पहले ही UCC विधेयक पारित कर चुकी है, जिससे देश भर में इसे लागू करने की चर्चा तेज हो गई है।
लव जिहाद और लैंड जिहाद पर कड़ा प्रहार
UCC के साथ-साथ, असम में भाजपा ने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून बनाने की घोषणा की है। उत्तराखंड में पहले से ही सख्त धर्मांतरण कानून लागू है और सरकार अवैध कब्जों को हटाने के लिए भू-कानून पर सख्ती से काम कर रही है। इसी तर्ज पर अब दूसरे राज्यों में भी इन मुद्दों पर कड़े कदम उठाने की तैयारी की जा रही है।
भविष्य की चुनावी रणनीति
हालिया जीत और जनता के समर्थन को देखते हुए भाजपा नेता अब 2027 के विधानसभा चुनाव, 2029 के लोकसभा और यहाँ तक कि 2032 के चुनावों की रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पार्टी का मानना है कि उत्तराखंड में मिली सफलता ने उनके लिए आगे की राह आसान कर दी है, जिससे उन्हें आगामी चुनावों में ‘हैट्रिक’ लगाने का भरोसा मिल रहा है।

