उत्तराखंड में सेहत का सवाल ऐसा है जिसका जवाब अभी तक कोई सरकार नहीं दे पाई..खास कर पहाड़ी इलाकों में तो अस्पताल की हालत सुधारना और डॉक्टर तैनात करना शेर को काबू करने जैसा है।
लेकिन धामी सरकार से अबकी दफे कुछ उम्मीद जगी है। दरअसल सूबे के नए चिकित्सामंत्री सुबोध उनियाल राज्य की बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था का ईलाज करने की जुगत में लग चुके हैं। ऐसे में उनियाल का दावा है कि श्रीनगर गढ़वाल के वीर चंद्र सिंह मेडिकल कॉलेज में एक महीने के भीतर कैथ लैब शुरू की जाएगी।
वहीं चार धाम यात्रा को देखते हुए एक अत्याधुनिक ट्रामा सेंटर भी बनाया जाएगा। तो अल्मोड़ा और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की कैथलैब में कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती की जाएगी। इतना ही नहीं हल्द्वानी के राज्य कैंसर संस्थान में एक पखवाड़े के भीतर ओपीडी शुरू हो जाएगी।
हालांकि हकीकत ये है कि राज्य के पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य महकमे के सत्तर फीसदी पदों पर तैनाती ही नहीं है। कमी सिर्फ अस्पतालों में नहीं मेडिकल कॉलेज भी फैकल्टी की किल्लत से जूझ रहे हैं फिर चाहे वो देहरादून का ही मेडिकल कॉलेज ही क्यों न हो।
बहरहाल उनियाल ने कहा है कि उत्तराखंड में तैनात सीनियर रेजिडेंट की पगार उत्तर प्रदेश की तर्ज पर बढ़ाई जाएगी। वहीं राज्य के पर्वतीय इलाकों में अस्पताल के नजदीक हैलीपैड भी तैयार किए जांएगे ताकि आपातकाल के वक्त चिकित्सा सेवा आसानी से दी जा सके।
वहीं उनियाल की हसरत है कि स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस भी 108 सेवा की तर्ज पर दौड़े ताकि जरूरतमंदों को ईलाज के लिए सही टाइम पर अस्पताल पहुंचाया जा सके। तय है कि अगर स्वास्थ्य महकमे के अफसरों ने सबकुछ उनियाल की सोच के ब्लूप्रिंट के मुताबिक तैयार किया तो हालात सुधर भी सकते हैं। होगा क्या ये वक्त बताएगा फिलहाल सराकर का इरादा काबिलेतारीफ है।

