ऋषिकेश AIIMS की ऐतिहासिक सफलता; 13 घंटे चली जटिल सर्जरी, पहला लीवर ट्रांसप्लांट हुआ सफल

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उत्तराखंड की योगनगरी ऋषिकेश में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है । संस्थान में पहली बार एक मरीज का लीवर सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है । यह उपलब्धि बिजनौर की एक 25 वर्षीय युवती के अंगदान के कारण संभव हो सकी, जिसे ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद उसके अंगों से चार अलग-अलग मरीजों को नया जीवन मिला । इस पूरी प्रक्रिया में ग्रीन कॉरिडोर का उपयोग करते हुए ऋषिकेश से दिल्ली एम्स तक मात्र साढ़े तीन घंटे में किडनी पहुंचाई गई ।

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अंगदान से चार मरीजों को मिला जीवनदान

बिजनौर की एक युवती सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जिसे डॉक्टरों ने इलाज के दौरान ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया । इसके बाद युवती के परिजनों के सहयोग से अंगदान की प्रक्रिया पूरी की गई । दान किए गए अंगों में से एक किडनी और लीवर एम्स ऋषिकेश में भर्ती मरीजों को लगाए गए, जबकि दूसरी किडनी और पैनक्रियाज दिल्ली एम्स भेजे गए ।

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ग्रीन कॉरिडोर के जरिए समय की बचत

अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने सड़क मार्ग पर ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया । इसकी मदद से ऋषिकेश से दिल्ली की दूरी मात्र 3.5 घंटे में तय की गई, जिससे अंगों की कार्यक्षमता सुरक्षित रही और दिल्ली में भर्ती मरीज का सफल प्रत्यारोपण हो सका । पूरी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया गुरुवार रात 9 बजे शुरू होकर शुक्रवार सुबह 10 बजे तक, यानी लगभग 13 घंटे चली ।

विशेषज्ञों की टीम और भविष्य की योजना

इस जटिल सर्जरी को अहमदाबाद के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रांजल मोदी के मार्गदर्शन और एम्स ऋषिकेश की निदेशक प्रो. मीनू सिंह की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम ने अंजाम दिया । संस्थान पिछले कुछ वर्षों से लीवर ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग पर काम कर रहा था, जिसका परिणाम इस पहली सफल सर्जरी के रूप में सामने आया है । प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि भविष्य में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाकर और भी लोगों की जान बचाई जाएगी ।