Rishikesh-Karnaprayag: गंगा नदी पर 125 मीटर गर्डर की सफल लॉन्चिंग

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देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों में भारतीय रेलवे की सबसे चुनौतीपूर्ण ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई ब्रॉडगेज रेल परियोजना के काम में एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। रेल विकास निगम लिमिटेड के इंजीनियरों ने देवप्रयाग के पास पंत गांव में स्थित ब्रिज संख्या-6 पर, पवित्र गंगा नदी के ठीक ऊपर 125 मीटर लंबे विशालकाय ओपन वेब स्टील गर्डर की सफल लॉन्चिंग कर दी है। इस बेहद जटिल काम के पूरा होते ही पहाड़ों में रेल लाइन बिछाने की एक बहुत बड़ी बाधा दूर हो गई है।

बेहद खतरनाक भौगोलिक परिस्थितियों और काम करने की सीमित जगह के बीच, आधुनिक तकनीक के सहारे इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया गया है। यह पुल कोई साधारण पुल नहीं है, बल्कि यह सीधे टनल-5 को टनल-6 से जोड़ने का काम करेगा। इसके शुरू होने से परियोजना के दो अलग-अलग निर्माण खंडों के बीच सीधा रेल संपर्क स्थापित हो गया है, जिसे इस रूट का सबसे बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

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गंगा नदी से 28 मीटर ऊपर हवा में चला ऑपरेशन

इंजीनियरों के लिए सबसे बड़ा इम्तिहान गंगा नदी के ऊपर करीब 28 मीटर की ऊंचाई पर कैंटीलीवर की स्थिति में इस गर्डर को लॉन्च करना था। हवा में लटकी इस भारी-भरकम संरचना का संतुलन बनाए रखने के लिए एडवांस्ड मॉनिटरिंग तकनीक और आधुनिक उपकरणों की मदद से हर एक पॉइंट की पल-पल की निगरानी की गई। सीमित जगह होने के बावजूद टनल के काम को रोके बिना भारी मशीनों का संचालन एक विशेष सुरक्षा योजना के तहत किया गया।

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आरवीएनएल के मुख्य परियोजना प्रबंधक हिमांशु बडोनी ने बताया कि ब्रिज संख्या-6 पर इस गर्डर की लॉन्चिंग देश की एक महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग उपलब्धि है। अत्यंत कठिन पहाड़ों के बीच सटीक प्लानिंग और उच्च सुरक्षा मानकों के साथ इस जटिल काम को बिना किसी चूक के सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।

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अगर इस पुल के भारी-भरकम ढांचे की बात करें तो इसकी कुल लंबाई 157.650 मीटर है, जिसमें 125 मीटर का हिस्सा पूरी तरह स्टील गर्डर का है। इस विशालकाय गर्डर का कुल वजन करीब 2059.89 मीट्रिक टन है, जिसे एक विशेष लॉन्चिंग प्रणाली के जरिए पक्के तौर पर पिलर्स पर स्थापित कर दिया गया है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस पुल को भारतीय रेलवे के 25 टन (2008) के सबसे भारी लोडिंग मानक के अनुरूप तैयार किया गया है।

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