देहरादून। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस लीडर राहुल गांधी 17 जुलाई शुक्रवार को देहरादून आने वाले हैं। यहां राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शिरकत करेंगे और छात्रों से संवाद करेंगे..पिछले दिनो राहुल ने राजस्थान के कोटा में भी छात्रों से संवाद किया था और देश की शिक्षा नीति पर सवाल दागा था। माना जा रहा है कि देहरादून में राहुल गांधी एक तीर से दो शिकार की कोशिश करेंगे। क्योंकि राज्य चुनावी मोड में है।
बहरहाल राहुल के आऩे से पहले भाजपा आईटीसेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर निशाना साधा है। ट्विटर पर की गई पोस्ट के जरिए अमित मालवीय ने उत्तराखंड में रही कांग्रेस सरकारों की कुंडली ओपन करते हुए राहुल गांधी से सवाल पूछा है कि,उत्तराखंड को भर्ती घोटालों का “Epicentre” किसने बनाया था? इतिहास गवाह है कि इसकी जड़ें कांग्रेस के शासनकाल में हैं।

वहीं अमित ने पोस्ट के जरिए राहुल गांधी को नसीहत भी दी है अमित मालवीय ने पोस्ट में लिखा है, देहरादून आने से पहले उत्तराखंड की जनता और युवाओं को पूरा सच भी बता दीजिए। अमित मालवीय ने ट्विटर हैंडल पर उत्तराखंड की पहली निर्वाचित एन.डी. तिवारी सरकार में हुए दरोग भर्ती घोटालों और पटवारी भर्ती प्रकरण में हुई गडबडियों का जिक्र किया है।
वहीं आमित मालवीय ने साल 2014 से 2017 में काबिज रही हरीश रावत सरकार को भी कटघरे में खड़ा किया है। मालवीय ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि, 2016 की UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा विवादों में रही। बाद की जांच में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
- सिडकुल भर्ती विवाद में पक्षपात और प्रभावशाली लोगों के रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगे। SIT जांच तक करनी पड़ी।
- UBTER और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की भर्तियां भी लगातार विवादों और अनियमितताओं के आरोपों में घिरी रहीं। अमित ने अपनी ट्वीटर पोस्ट में लिखा, यानी जिस दौर में कांग्रेस सत्ता में थी, उस समय भर्ती प्रक्रियाओं पर लगातार सवाल उठे, जांच एजेंसियां लगीं, भर्तियां रद्द हुईं और युवाओं का विश्वास टूटता गया।
वहीं अमित मालवीय ने सूबे की मौजूदा धामी सरकार की तारीफ करते हुए कांग्रेस नेता को आईना दिखाया है, मालवीय ने लिखा अब वर्तमान की भी बात कर लेते हैं। जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में UKSSSC भर्ती घोटाले का मामला सामने आया, तो क्या उसे दबाया गया? नहीं।
- देश का सबसे कठोर नकल-विरोधी कानून बनाया गया।
- 100 से अधिक नकल माफियाओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
- भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक सुधार किए गए।
- पिछले चार वर्षों में 34,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से मिली हैं।
यही फर्क है कि कांग्रेस के दौर में घोटाले होते थे, कार्रवाई नहीं होती थी। भाजपा सरकार में गड़बड़ी सामने आई तो कानून बना, माफिया जेल गए, जांच हुई, गिरफ्तारियां हुईं और व्यवस्था बदली गई।
युवाओं के भविष्य पर राजनीति करने से पहले यह भी बताइए कि जिन भर्ती घोटालों की नींव कांग्रेस के शासनकाल में पड़ी, उनके लिए जवाबदेह कौन था?
उत्तराखंड का युवा सब याद रखता है। उसे भाषण नहीं, रिकॉर्ड दिखाई देता है। एक तरफ भर्ती घोटालों का इतिहास है, दूसरी तरफ कठोर कानून, माफियाओं पर कार्रवाई, पारदर्शी भर्ती व्यवस्था और हजारों युवाओं को योग्यता के आधार पर मिली सरकारी नौकरियां।
युवाओं के सपनों की सबसे बड़ी दुश्मन वह राजनीति है जिसने वर्षों तक व्यवस्था को सड़ने दिया। और युवाओं का सबसे बड़ा साथी वह शासन है जिसने व्यवस्था को साफ किया, कानून को सख्ती से लागू किया और भर्ती प्रक्रिया में विश्वास बहाल किया।
अमित मालवीय की ट्वीटर पोस्ट के बाद राज्य में सियासत का टेंपरेचर बढ़ गया है। बहरहाल देखना ये दिलचस्प होगा कि छात्रों की गूंज में राहुल को सुनने के लिए कितने छात्र शिरकत करते हैं।

