Uttarakhand: ‘भुली योजना’ से करोड़पति बनेंगी महिलाएं! सरकार देगी 7.50 लाख तक की मदद

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड के ग्राम्य विकास विभाग ने राज्य की महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक नई और महत्वाकांक्षी पहल ‘भुली योजना’ (बिजनेस हैंडहोल्डिंग यूनिट फॉर लाइवलीहुड इन्क्यूबेशन) की शुरुआत की है।

इस योजना के तहत राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ी उन महिलाओं के कारोबार को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा जो पहले से छोटे उद्यम चला रही हैं। सरकार ने इस विशेष योजना के तहत महिला उद्यमियों को अपने बिजनेस को बड़ा करने के लिए 1.66 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 7.50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का बड़ा प्रावधान किया है।

ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने इस योजना को लेकर कहा कि ‘भुली योजना’ के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के नए मौके पैदा होंगे, जिससे पहाड़ों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। मंत्री चौधरी ने साफ किया कि इस योजना के पीछे सरकार का मुख्य मकसद आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को सिर्फ लखपति दीदी के स्तर तक सीमित न रखकर, उन्हें करोड़पति दीदी बनाने की दिशा में आगे ले जाना है।

यह भी पढ़ें -  Badrinath चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा, CCTV फुटेज में दिखे कई और चेहरे, पुलिस ने जब्त किया NVR

इस योजना का लाभ उठाने के लिए विभाग ने कुछ जरूरी और अनिवार्य शर्तें भी लागू की हैं, ताकि यह आर्थिक मदद सीधे सही लाभार्थियों तक ही पहुंचे। नियमों के मुताबिक, आवेदन करने वाली महिला का उत्तराखंड का मूल निवासी होना पहली शर्त है। इसके साथ ही, महिला उद्यमी का राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ा होना भी अनिवार्य किया गया है ताकि जमीनी स्तर पर काम कर रहे स्वयं सहायता समूहों को इसका सीधा लाभ मिल सके।

योजना की गाइडलाइन में एक और महत्वपूर्ण बात कही गई है कि संबंधित स्वयं सहायता समूह या बिजनेस यूनिट पूरी तरह से महिला नेतृत्व में ही चलनी चाहिए। सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि उस कारोबार से जुड़े सभी छोटे-बड़े और नीतिगत फैसलों में महिला की भूमिका अनिवार्य और निर्णायक होनी चाहिए। बिना महिला लीडरशिप और उनके अंतिम फैसले के किसी भी बिजनेस यूनिट को इस योजना के तहत वित्तीय मदद नहीं दी जाएगी।

यह भी पढ़ें -  Uttarakhand: सोंग नदी घाटी में देश का अनूठा कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट शुरू, जानें कैसे होगी कमाई

ग्राम्य विकास विभाग द्वारा तय की गई इन तीनों श्रेणियों के आधार पर ही आर्थिक सहायता की राशि तय होगी, जिसमें पहली व्यक्तिगत श्रेणी के तहत आवेदन करने वाली महिला उद्यमी के उद्यम का सालाना टर्नओवर 10 से 12 लाख रुपये होना चाहिए, जिन्हें व्यापार बढ़ाने के लिए 1.66 लाख रुपये की वित्तीय मदद दी जाएगी।

वहीं दूसरी ओर, छोटे स्वयं सहायता समूह वर्ग में आने वाले उन समूहों का सालाना टर्नओवर 12 से 15 लाख रुपये के बीच होना जरूरी है जिन्हें कारोबार विस्तार के लिए 2.50 लाख रुपये का लोन सपोर्ट मिलेगा, जबकि तीसरी श्रेणी में आने वाले बड़े महिला समूहों का सालाना टर्नओवर 20 लाख रुपये या उससे अधिक होना तय किया गया है जिन्हें भुली योजना के तहत अधिकतम 7.50 लाख रुपये तक की सबसे बड़ी आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाएगी।

भुली योजना के तहत चुनी गई महिला उद्यमियों को सिर्फ आर्थिक मदद देकर ही नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उनके बिजनेस को प्रोफेशनल तरीके से आगे बढ़ाने के लिए देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी काशीपुर की एक एक्सपर्ट टीम को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है। आईआईटी काशीपुर की यह विशेष टीम लगातार इन महिलाओं के संपर्क में रहेगी और उन्हें आधुनिक बाजार की मांग के हिसाब से व्यापार बढ़ाने के जरूरी प्रैक्टिकल गुण सिखाएगी।

यह भी पढ़ें -  Harela Festival: उत्तराखंड खनन विभाग लगाएगा 51,000 पौधे, 'एक वृक्ष मां के नाम' अभियान की शुरुआत

इस योजना के तहत सरकारी लोन और तकनीकी सहायता पाने वाले हर स्वयं सहायता समूह के कंधों पर सरकार ने एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी भी डाली है। योजना का लाभ लेने के बाद इन महिला समूहों को अपने स्थानीय स्तर पर कम से कम तीन से चार नए रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। सरकार की सोच यह है कि जब इस मदद से महिलाओं का कारोबार बढ़ेगा, तो वे न केवल खुद आर्थिक रूप से मजबूत होंगी बल्कि गांव के अन्य बेरोजगार युवाओं को भी अपने साथ काम देकर आत्मनिर्भर बनाएंगी।

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad