पिथौरागढ़ में चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन, महिला पर FIR

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पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ के बलुवाकोट क्षेत्र में चाइल्ड पोर्नोग्राफी नेटवर्क को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की सीधी निगरानी और सख्त निर्देश के बाद स्थानीय पुलिस और साइबर सेल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए क्षेत्र की एक महिला के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। आरोपी महिला पर सोशल मीडिया के जरिए कई लोगों को बच्चों से संबंधित अश्लील वीडियो और प्रतिबंधित डिजिटल सामग्री भेजने का सनसनीखेज आरोप है।

इस पूरे मामले का सबसे बड़ा पहलू यह है कि इस गंभीर डिजिटल अपराध को दिल्ली में बैठे केंद्रीय गृह मंत्रालय की साइबर मॉनिटरिंग विंग ने खुद ट्रैक किया था। महिला की संदेहास्पद ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर पड़ते ही गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड पुलिस और साइबर सेल को तत्काल गहन जांच और कड़े एक्शन के निर्देश जारी किए थे। इसके बाद एक्टिव हुई साइबर सेल की टेक्निकल टीम ने जब महिला की फेसबुक आईडी, मोबाइल नंबर और इंटरनेट फुटप्रिंट्स को खंगाला, तो सारे आरोप बिल्कुल सही पाए गए।

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पुलिस की जांच में सामने आया है कि बलुवाकोट के गुईयां क्षेत्र की रहने वाली आरोपी महिला सीता देवी पिछले काफी समय से इस अवैध गतिविधि में लिप्त थी। वह मोबाइल फोन पर व्हाट्सऐप ग्रुप्स और व्यक्तिगत नंबरों के जरिए चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े लिंक धड़ल्ले से शेयर कर रही थी। इन लिंक्स को ओपन करने पर बच्चों से संबंधित बेहद आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो सामने आ रहे थे, जो कि कानूनन एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है।

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सीमांत क्षेत्र में इस तरह के घिनौने साइबर अपराध में एक महिला का नाम मुख्य आरोपी के तौर पर सामने आने के बाद पूरे पिथौरागढ़ जिले में हड़कंप मच गया है। बलुवाकोट पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि महिला के पास इस तरह के प्रतिबंधित और अश्लील लिंक्स कहां से आ रहे थे। पुलिस को अंदेशा है कि इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा संगठित साइबर गिरोह या ऑनलाइन रैकेट काम कर रहा हो सकता है, जिसकी कड़ियां तलाशी जा रही हैं।

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पुलिस अधिकारियों ने इस मामले पर सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इंटरनेट या किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री देखना, उसे डाउनलोड करना या किसी दूसरे को फॉरवर्ड करना ‘पॉक्सो एक्ट’ और ‘आईटी एक्ट’ के तहत जेल भेजने वाला अपराध है। पुलिस ने जनता से अपील की है कि अगर किसी के भी व्हाट्सऐप पर ऐसे संदिग्ध लिंक आते हैं, तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें।

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