उत्तराखंड में बरसात पहले भी बरसती थी लेकिन अपने साथ खुशहाली लाती थी..लेकिन अब पिछले दो दशक से देखा जा रहा है कि मानसून में आसमान से बारिश नही आफत बरसती है। बरसाती नदियां उफनती हुई मिलती हैं तो पहाड़ अपनी जड़ों से टूटकर दरकते हुए दिखाई देते हैं। उत्तराखंड की देह पर भूस्खलन के निशान बनाता हुआ मानसून निकल जाता है और अपने पीछे छोड जाता है तबाही के ढेर पर बैठे सिसकते हुए उत्तराखंड को, बर्बादियों के हिसाब किताब लगाते हुए शासन -प्रशासन को ।
टिहरी जिले के भिलंगना विकासखंड में लगातार हो रही बेहिसाब बारिश ने ग्राम सभा भिगुन भूस्खलन की कगार पर खड़ा कर दिया है। गांव के वजूद पर खतरा मंडरा रहा है. गांव को जोड़ने वाला इकलौता मोटर मार्ग का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है और गांव का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक बीते दो दिनों से हो रही बेहिसाब बारिश से पहाड़ी दरकने लगी है। जगह-जगह से मलबा सड़क पर आ गया है। मोटर मार्ग टूट जाने से ग्रामीणों का तहसील और बाजार से संपर्क पूरी तरह कट गया है। राशन, दवाइयों और जरूरी सामान की आवाजाही भी ठप पड़ गई है।
सबसे बड़ी चिंता आबादी क्षेत्र को लेकर है। पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिर रहे हैं। ग्रामीण दहशत में रात गुजारने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि यदि बारिश इसी रफ्तार से जारी रही तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
आधा दर्जन से ज्यादा परिवारों के मकानों में दरारें आने की भी सूचना मिली है। भूस्खलन की जानकारी मिलते ही प्रशासन चौकस हो गया है। पटवारी ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया। लेकिन अभी ग्रामीणों को कोई राहत भरोसा नहीं मिला है। सड़क पर मलबा जस का तस पड़ा है । ग्रामीण जिला प्रशासन से सड़क खोलने और गांव के हालात का जायजा लेने की गुहार लगा रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीणो की मांग है कि खतरे की जद में आए परिवारों को विस्थापित किया जाए।
वहीं इस पूरे मामले पर अपर जिलाधिकारी शैलेन्द्र सिंह नेगी ने बताया कि “घनसाली से सूचना प्राप्त हुई है कि भिगुन में लगातार बारिश के चलते लैंडस्लाइड की स्थिति बन रही है। इसको लेकर एसडीएम द्वारा भू-वैज्ञानिक से सर्वे कराने की संस्तुति की गई है। जल्द ही टीम मौके पर जाकर भू-सर्वेक्षण करेगी और रिपोर्ट के आधार पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।”फिलहाल भिगुन गांव की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

