नैनीताल/ज्योलीकोट। प्रशासन कह रहा है – पानी में क्लोरीनेशन हो रहा है, जलमहकमा कह रहा है पानी का क्लोरीनेशन कर रह हैं. स्वास्थ्य विभाग कह रहा है, जनता को कैंप लगाकर लगातार जागरूक किया किया जा रहा। बावजूद इसके ज्योलीकोट इलाके में पीलिया न केवल अपनी जड़े जमा रहा है बल्कि मौत भी बांट रहा है। ज्यूलीकोट दहशत में हैं उसे लगता है नलों से जहर टपक रहा है।
सरियाताल, ज्योलीकोट निवासी उमेश्वर जीना का सोलह साल का इकलौते बेटे रितेश को पीलिया ने अपना निवाला बना लिया । बताया जा रहा है बीते 18 अगस्त को रितेश को पीलिया ने अपनी गिरफ्त में लिया। हल्द्वानी के अस्पताल में पीलिया पीड़ित रितेश को दिखाया गया लेकिन पीलिया इतना बढ़ चुका था कि डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और दिल्ली ले जाने की सलाह दी।
रितेश के पिता बेटे को दिल्ली ले गए एक निजी अस्पताल में जांच पड़ताल हुई पता चला रितेश का लीवर खराब हो चुका है । अब रितेश की जिंदगी लिवर ट्रांसप्लांट से ही बचेगी । लाचार पिता ने खर्च पूछा तो, एक करोड बताई गई। एक करोड़ सुनते ही लाचार पिता के पांवों तले जमीन खिसक गई। दरअसल रितेश के पिता कोई धन्ना सेठ नहीं उपनल के मार्फत उद्यान विभाग मे तैनात मामूली माली हैं ।
जिनकी पगार से महंगाई के दौर में घर का चूल्हा भी बड़ी जद्दोजहद के साथ सुलगता हो वो एक करोड़ का इंतजाम खुद को गिरवी रख कर भी नहीं कर सकते थे। लिहाजा बेटे की जान बचाने के लिए पिता ने दिल्ली में राममनोहर लोहिया अस्पताल की दहलीज पर दस्तक दी। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पीलिया ने पिता के हाथ से उसके जिगर के टुकड़े रितेश को छीन लिया। बीती शाम रितेश ने दम तोड़ दिया। बुढापे की लाठी को गंवा चुका पिता उस पानी को कोस रहा है जिसने उसके बेटे रितेश को लीवर का रोगी बनाकर हमेशा हमेशा के लिए उससे छीन लिया। अब रितेश के माता- पिता के पास उसकी यादों के सिवा कुछ नहीं बचा।
ज्यूलीकोट में पीलिया ने सिर्फ जीना परिवार में ही अंधेरा नहीं किया बल्कि नीरज जोशी की पत्नी नीमा जोशी को भी छीन लिया है. उसकी दो अबोध बेटियों को भी मां के साए से महरूम कर दिया है। बताया जा रहा है कि एक सिंतबर की रात को नीमा को ईलाज के लिए हल्द्वानी ले जाया गया। जांच में लीवर इंफेक्शन निकला. हालात बिगड़ते देख नीमा को राममूर्ति अस्पताल बरेली रेफर किया गया। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ बीती रात नीमा ने भी हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। नीरज अकेला हो गया है।
दिहाड़ी मजदूरी करने वाले नीरज की गोद में दो एक चार साल और दूसरी डेढ साल की बेटियां छूट गई हैं जिनकी मां को पीलिया निगल गया। बताया जा रहा है परिवार के पांच सदस्य भी पीलिया से पीड़ित हैं। नैनीताल के ज्यूलीकोट इलाके में लोग दहशत में हैं। उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि नल से पानी की सप्लाई हो रही है या मौत के सामान की ।
अगर ये सच है कि ज्यूलीकोट में नलो के जरिए दूषित पानी सप्लाई हो रहा है तो उसकी जांच होनी चाहिए. जो जिम्मेदार हैं ऊपर से नीचे तक उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि पीलिया ने एक घर में चिराग बुझाया है और दूसरे घर से अबोध बच्चियों के सिर से मां का साया उठाया है। पांच और पीलिया की चपेट में हैं । ज्यूलीकोट के ग्रामीण नलों को देखकर हर पल दहशत मे जी रहे हैं उनके जिस्म पीले पड़ रहे हैं।
है कोई रहमदिल जिम्मेदार, जिसकी रूह ज्यूलीकोट के इन किस्सों को सुनकर कांप गई हो , जो भरोसा दिला सकता है कि इंतेहा हो गई है अब नलों से जहर नहीं टपकेगा !

