उत्तराखंड में स्वास्थ्य महकमा पहाड़ से लेकर मैदान तक वेंटीलेटर में है ये दावे के साथ कहा जा सकता हैं।उसकी वजह है आए दिन स्वास्थ्य महकमे की पोल खोलती तस्वीरें. बीते बुधवार को चमोली जिले के एक गांव से वीडियो सोशल मीडिया में वॉयरल हुआ जिसमें लोकनिर्माण विभाग और सरकारी स्वास्थ्य महकमा डंडी कंडी पर लटके दिखाई दिए. साफ दिख रहा है कि स्वास्थ्य महकमे की सेहत न तो पहाड़ी जिलों में दुरुस्त है न मैदानी जिलों में सेहतमंद। हर जगह सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को पैरालाइसिस हो रखा है। जिसे मेडिसन भी चाहिए और फिजियोथिरेपी भी । मतलब सिस्टम को ईलाज की दरकार है।
अभी चमोली जिले के गांवों की स्वास्थ्य सेवा की हकीकत ने संजीदा लोग को मायूस किया और अब उधमसिंहनगर से हो रहे वॉयरल वीडियो ने सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पगार भत्ते वक्त पर हैं तो जरूरतमंदों को इलाज के लिए इतना क्यों सताया जा रहा है।
उधमसिंहनगर जिले के काशीपुर से वॉयरल वीडियो ने उस भ्रम को भी तोड़ दिया है कि मैदानी जिलों में सरकारी स्वास्थ्य सेवा चाक चौबंद होगी। दरअसल वॉयरल वीडियो में डॉक्टर साहब को मरीजों के लिए दवा के पर्चे हों या उनकी पड़ताल सभी के लिए मोमबत्ती की रोशनी का सहारा लेना पड़ रहा है। क्योंकि काशीपुर के एलडी भट्ट उपजिला चिकित्सालय के कमरा नंबर 64 में बिजली की सहूलियत नहीं है।
बताया जा रहा है कि जब अस्पताल में तैनात चिकित्सक मोमबत्ती की रोशनी में ओपीडी कर रहे थे उस वक्त किसी दूसरे मरीज ने अपने मोबाइल पर अस्पताल की हकीकत संभाल दी जो वॉयरल हो गई। अब वो वीडियो बड़ी तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दौड रही है और उत्तराखंड के स्वास्थ्य महकमे की सेहत पर सवाल कर रही है।
इस तस्वीर से साफ हो गया है कि पहाड़ी जिलों को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि उत्तराखंड के मैदानी जिलों में स्वास्थ्य महकमें का हाल चाल दुरुस्त होगा। मैदानी जिलों में भी सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं उन्हें भी इलाज की दरकार है। हालांकि इस मर्ज का इलाज कब और कैसे होगा ये यक्ष प्रश्न बना हुआ है। दरअसल जिनके कांधे पर जिम्मेदारी है उन्हे फर्क नहीं पड़ता अगर फर्क पड़ता तो सूबे में स्वास्थ्य सेवाएं न डंडी कंडी पर होती न बिजली के दौर में मोमबत्ती से उजाला मांगती।
हालांकि वॉयरल वीडियो की समाचार 4 U पुष्टि नहीं करता लेकिन अगर ये वीडियो सच है तो स्वास्थ्य महकमे को अपने गिरेबान में झांकने की दरकार है इसमें कोई दो राय नहीं।

