देहरादून। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध छह अशासकीय डिग्री कॉलेजों के करीब डेढ़ हजार छात्र-छात्राओं के सामने परास्नातक में पढ़ाई जारी रखने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय स्नातक का पहला बैच पास आउट होने के बाद इन छात्रों को एक वर्षीय पीजी में दाखिला लेना था, लेकिन विश्वविद्यालय की एक नई शर्त के चलते पूरी प्रवेश प्रक्रिया अटक गई है।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी शर्त के अनुसार, एक वर्षीय पीजी की नई सीटें अलग से नहीं दी जाएंगी, बल्कि उन्हें कॉलेजों में पहले से स्वीकृत दो वर्षीय पीजी की कुल सीटों में से ही काटना होगा। पेंच यह फंसा है कि विश्वविद्यालय द्वारा 31 अगस्त को यह सूचना भेजने और 4 सितंबर को पोर्टल खोलने से पहले ही, कॉलेजों में दो वर्षीय पीजी की ज्यादातर सीटें भर चुकी हैं। ऐसे में अब एक वर्षीय पीजी के छात्रों के लिए सीटें ही नहीं बची हैं।
इस फैसले की वजह से देहरादून के DAV, डीबीएस, एमकेपी, एसजीआरआर, महिला महाविद्यालय सतीकुंड हरिद्वार और बीएसएम कॉलेज रुड़की के विद्यार्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है। किसी भी दूसरे विश्वविद्यालय में भी सीटें खाली न होने से छात्र और उनके अभिभावक परेशान हैं। इस अव्यवस्था के खिलाफ दून के डीएवी कॉलेज में छात्रों और शिक्षकों ने बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
मामले पर डीएवी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. कौशल कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय अब हर विषय के लिए शुल्क के आधार पर अलग से एफिलिएशन लेने को कह रहा है, जिसमें काफी समय और धन लगेगा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन से बातचीत कर छात्रों के हित में जल्द समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
वहीं, गढ़वाल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. वाईपी रायवानी ने सफाई देते हुए कहा कि एनईपी के तहत यह व्यवस्था पहली बार लागू हो रही है और गाइडलाइंस के तहत ही ऑनर्स विद्यार्थियों के लिए पोर्टल खोला गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कॉलेजों में सीटें कम पड़ रही हैं, तो कॉलेज प्रबंधन नियमानुसार अतिरिक्त सीटों के लिए एफिलिएशन का आवेदन कर सकता है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जाएगी।

