देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की प्रशासनिक तैयारियों के बीच देहरादून में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जांच का बड़ा काम शुरू होने जा रहा है। निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 1 से 7 अक्टूबर तक नई दिल्ली से आ रही तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ईवीएम मशीनों की फर्स्ट लेवल चेकिंग करेगी। इस प्रक्रिया का सीधा असर आगामी चुनावों की निष्पक्षता और जिला स्तर की तैयारियों पर पड़ेगा।
मार्च 2027 में विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने चुनावी व्यवस्थाओं को परखना शुरू कर दिया है। यद्यपि चुनाव अपने तय समय पर होंगे या उससे पहले कराए जाएंगे, इस पर स्थिति आधिकारिक रूप से स्पष्ट नहीं है, लेकिन आयोग वोटर लिस्ट अपडेशन से लेकर मतदान केंद्रों के भौतिक निरीक्षण के काम को तेजी से निपटा रहा है।
अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाली एफएलसी प्रक्रिया के दौरान भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस समेत सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। इस दौरान विशेषज्ञ मशीनों में मॉक वोट डालकर उनकी कार्यप्रणाली जांचेंगे। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी नरेंद्र देवली के अनुसार, जांच के दौरान तकनीकी रूप से खराब पाई जाने वाली किसी भी ईवीएम को तुरंत रिजेक्ट कर अलग कर दिया जाएगा।
चुनावी व्यवस्था को मजबूती देने के लिए राज्य निर्वाचन कार्यालय को 12,500 नई ईवीएम प्राप्त हुई हैं, जिसके बाद प्रदेश में कुल ईवीएम की संख्या बढ़कर 23,000 हो गई है। इसके अलावा देहरादून जिले की 10 विधानसभा सीटों के लिए बिहार से 900 वीवीपैट और 3,000 कंट्रोल यूनिट भी देहरादून पहुंच चुकी हैं, जिनकी गहन जांच अक्टूबर में की जाएगी।
मौसम साफ होते ही प्रदेशभर के सभी मतदान केंद्रों का दोबारा सर्वे किया जाएगा। टीम यह देखेगी कि बारिश के कारण किसी केंद्र की इमारत या बुनियादी सुविधाओं को नुकसान तो नहीं पहुंचा है। यदि कोई मतदान केंद्र क्षतिग्रस्त पाया जाता है, तो उसे समय रहते किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।
वहीं, दूसरी ओर राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य अंतिम चरण में है। SIR का दूसरा चरण जारी है और अधिकारियों के अनुसार 14 सितंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार कर ली जाएगी। इसके बाद 15 सितंबर को राज्य की अंतिम संशोधित वोटर लिस्ट का आधिकारिक रूप से प्रकाशन कर दिया जाएगा।

