उत्तराखंड फार्मासिस्टों की 5 सूत्रीय मांगों पर सरकार की बैठक, 391 पदों का मुद्दा उठा

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देहरादून। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में सचिवालय में डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन की पांच सूत्रीय मांगों को लेकर बैठक हुई। एसोसिएशन ने अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं और बताया कि अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया गया है।

बैठक में फार्मासिस्टों से जुड़े सेवा मामलों, स्वास्थ्य उपकेन्द्रों में पदों को क्रियाशील करने, फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 लागू करने और चारधाम यात्रा ड्यूटी से जुड़े लंबित भुगतान समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। एसोसिएशन की प्रमुख मांग है कि 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को प्रथम पदोन्नति के पद का वेतनमान दिया जाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य उपकेन्द्रों के लिए पहले से सृजित 391 फार्मेसी अधिकारी पदों को क्रियाशील करने की मांग भी रखी गई।

फार्मासिस्टों ने फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 लागू करने का मुद्दा भी उठाया। एसोसिएशन ने चिकित्सकों की अनुपस्थिति में निर्धारित औषधियां उपलब्ध कराने के लिए फार्मेसी अधिकारियों को अधिकृत किए जाने की मांग सरकार के सामने रखी। चारधाम यात्रा ड्यूटी से जुड़े लंबित देयकों के भुगतान का मामला भी बैठक में उठाया गया। एसोसिएशन ने यात्रा ड्यूटी से जुड़ी व्यवस्थाओं में सुधार की मांग करते हुए इस संबंध में भी कार्रवाई की अपेक्षा जताई।

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एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण संगठन की ओर से चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आंदोलन की शुरुआत 17 अगस्त से किए जाने की घोषणा की गई थी। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने एसोसिएशन की मांगों को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों के साथ प्रत्येक बिंदु पर चर्चा की। उन्होंने विभागीय स्तर पर मांगों को लेकर की जा रही कार्रवाई की जानकारी भी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों को दी।

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बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों का मुद्दा भी सामने आया। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में ग्रामीण आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। स्वास्थ्य उपकेन्द्रों के लिए सृजित 391 फार्मेसी अधिकारी पदों को क्रियाशील करने की मांग को इस संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि बैठक में इन पदों को तत्काल क्रियाशील करने की घोषणा नहीं की गई है, बल्कि मांग पर विभागीय स्तर पर की जा रही कार्रवाई की जानकारी दी गई।

फार्मेसी प्रैक्टिस रेगुलेशन-2015 और चिकित्सकों की अनुपस्थिति में निर्धारित औषधियां उपलब्ध कराने के अधिकार से जुड़ी मांग भी फार्मासिस्टों के कामकाज से सीधे संबंधित है। एसोसिएशन ने इन मुद्दों पर स्पष्ट कार्रवाई की मांग रखी है। वहीं 10 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद प्रथम पदोन्नति के पद का वेतनमान दिए जाने की मांग सेवा संबंधी विषय से जुड़ी है। एसोसिएशन ने इसे अपनी पांच सूत्रीय मांगों में शामिल करते हुए स्वास्थ्य मंत्री के सामने रखा।

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चारधाम यात्रा के दौरान ड्यूटी करने वाले फार्मासिस्टों के लंबित देयकों का भुगतान भी बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। एसोसिएशन ने भुगतान के साथ यात्रा व्यवस्थाओं में सुधार की मांग भी रखी। बैठक में कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा, वित्त सचिव दिलीप जावलकर, चिकित्सा स्वास्थ्य सचिव विनय शंकर पाण्डेय, महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य सुनीता टम्टा और अपर सचिव गंगा प्रसाद समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

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