देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सेवक सदन में राज्य के दूरस्थ व पर्वतीय क्षेत्रों से पहुंचे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज के लोगों के साथ अनौपचारिक संवाद किया। इस बैठक में टिहरी, देहरादून, उत्तरकाशी, चकराता और कालसी समेत कई इलाकों से आए प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों से जुड़ी विकास संबंधी मांगें रखीं। मुख्यमंत्री ने सभी की समस्याएं आत्मीयता से सुनते हुए अधिकारियों को उनके त्वरित समाधान के कड़े निर्देश दिए।
संवाद के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार का मूल संकल्प उत्तराखंड के हर वर्ग और हर क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। सरकार समेकित और समावेशी विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है, जिसमें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवाद कार्यक्रमों के जरिए जमीनी हकीकत सीधे सरकार तक पहुंचती है।

संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके बताए समानता और सामाजिक न्याय के मार्ग पर ही देश आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार समाज के वंचित तथा कमजोर वर्गों के शैक्षिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार ऐतिहासिक कदम उठा रही है।
अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पिछले पांच वर्षों में चकराता, जौनसार-बावर, उत्तरकाशी और अन्य सीमांत जिलों के सैकड़ों दौरे कर चुके हैं। उनका उद्देश्य केवल देहरादून तक सीमित रहना नहीं, बल्कि खुद पर्वतीय अंचलों में पहुंचकर वहां की वास्तविक परिस्थितियों को समझना रहा है।

सांस्कृतिक विरासत पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में बाबा साहेब से जुड़े स्थलों को ‘पंचतीर्थ’ के रूप में विकसित किया गया है। साथ ही, ‘आदि गौरव महोत्सव’ जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय संस्कृति और हस्तशिल्प को बड़ा मंच मिल रहा है। सरकार एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय और पीएम-जनमन जैसी योजनाओं के जरिए जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य व बुनियादी सुविधाओं का विस्तार कर रही है।
इस अवसर पर विधायक सरिता आर्या, विधायक दुर्गेश्वर लाल, सचिव विनय शंकर पांडेय, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

