देहरादून। केंद्र सरकार की विभिन्न विकास योजनाओं और बुनियादी परियोजनाओं के लिए मिलने वाले बजट को अब राज्य सरकारें अपनी सुविधा के अनुसार दूसरी मदों या अन्य कार्यों में ट्रांसफर नहीं कर पाएंगी। देशभर में 1 अप्रैल 2027 से लागू होने जा रही ‘वन नेशन, वन बजट लैंग्वेज’ व्यवस्था के तहत बजट के एक-एक रुपये का एक समान वर्गीकरण और पारदर्शी लेखांकन अनिवार्य कर दिया गया है।
वित्त विभाग द्वारा जारी नई गाइडलाइन्स के लागू होने से केंद्र और राज्य सरकारों के बजट लेखांकन में लंबे समय से चली आ रही भिन्नता पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। अब पूरे देश में सरकारी खर्चों की एक समान और पारदर्शी प्रणाली प्रभावी होगी, जिससे बजट में किसी भी प्रकार के हेर-फेर या अनियमितता की गुंजाइश नहीं बचेगी।
इस नई वित्तीय व्यवस्था के तहत वेतन, पेंशन, मजदूरी, यात्रा भत्ता, कार्यालय व्यय, अनुदान, सामाजिक सुरक्षा, छात्रवृत्ति, सड़क निर्माण और भवन निर्माण समेत कुल 62 प्रमुख वित्तीय मदों को साफ-साफ और स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसका सीधा असर राज्यों के वित्तीय अनुशासन पर पड़ेगा और वे निर्धारित मद के पैसे को किसी अन्य मद में री-डायरेक्ट नहीं कर सकेंगे।
खास बात यह है कि नई व्यवस्था में प्रशासनिक और बजटीय पार्दर्शिता बढ़ाने के लिए वेतन, मजदूरी, भत्ते, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, प्रशिक्षण और अवकाश यात्रा रियायत जैसे अलग-अलग मदों का लेखा-जोखा अलग से दर्ज किया जाएगा। पहले जहां पेंशन और सामाजिक सुरक्षा के व्यय व्यापक और जटिल श्रेणियों में दिखाई देते थे, वहीं अब उनका सटीक ब्योरा सामने आ सकेगा।
कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मियों से जुड़ी वित्तीय व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। पेंशन, ग्रेच्युटी और एनपीएस (NPS) व यूपीएस (UPS) में दिए जाने वाले सरकारी अंशदान को पूरी तरह से अलग-अलग विशिष्ट मदों में वर्गीकृत किया जाएगा। इससे यह पारदर्शी रूप से पता चल सकेगा कि सरकारी खजाने से पेंशन और रिटायरमेंट फंड में कितना आवंटन हुआ है।
इसके अलावा छात्रवृत्तियों, सरकारी अनुदानों और सब्सिडी को भी अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया जाएगा। इस व्यवस्था से केंद्र और राज्य सरकारों के लिए यह ट्रैक करना आसान हो जाएगा कि किसी विशेष कल्याणकारी योजना पर कितना पैसा खर्च हुआ, उसका वास्तविक लाभार्थी कौन बना और योजना का वास्तविक वित्तीय आकार क्या रहा। 1 अप्रैल 2027 से इस प्रणाली के लागू होने के बाद राज्यों को केंद्रीय बजटीय आवंटन का कड़ाई से पालन करना होगा।

