देहरादून। उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए अब तक कुल 21,913 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण पूरा कर लिया गया है। इस नेटवर्क के बनने से राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों में आवाजाही आसान हुई है और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच में बड़ा सुधार आया है।
गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ने के मामले में राज्य का अल्मोड़ा जिला शीर्ष स्थान पर रहा है। वहीं, शासन स्तर पर 8,500 किलोमीटर लंबी अतिरिक्त ग्रामीण सड़कों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। मंजूरी मिलते ही एक बड़ी ग्रामीण आबादी को सड़क सुविधा से जोड़ दिया जाएगा।
अल्मोड़ा में सबसे ज्यादा सड़कें, मैदानी जिले पीछे
जिलेवार स्थिति देखें तो अल्मोड़ा में सबसे अधिक 3,094 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बिछाई गई हैं। इसके बाद चमोली 2,587 किमी के साथ दूसरे, पौड़ी गढ़वाल 2,543 किमी के साथ तीसरे और पिथौरागढ़ 2,461 किमी के साथ चौथे स्थान पर है।
पर्वतीय जिलों में टिहरी गढ़वाल में 2,357 किमी, बागेश्वर में 1,605 किमी, उत्तरकाशी में 1,537 किमी और रुद्रप्रयाग में 1,391 किमी सड़कें बनी हैं। वहीं मैदानी और मिश्रित जिलों में देहरादून में 1,344 किमी, नैनीताल में 1,283 किमी, चंपावत में 1,262 किमी, हरिद्वार में 320 किमी और उधमसिंह नगर में मात्र 129 किलोमीटर सड़कें निर्मित हुई हैं।
विकास का जरिया हैं सड़कें: ग्राम्य विकास मंत्री
मामले में ग्राम्य विकास विभाग मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि सड़कें केवल आवाजाही का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये ग्रामीणों को सीधे विकास से जोड़ती हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य के सभी शेष गांवों को भी जल्द से जल्द पक्की सड़कों से जोड़ा जाए ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके।
250 से अधिक आबादी वाले गांवों को प्राथमिकता
PMGSY के नियमों के तहत वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 250 से अधिक आबादी वाले गांवों को सड़क मार्ग से जोड़ने में प्राथमिकता दी जा रही है। इससे कम आबादी वाले छोटे बस्तियों और गांवों को सड़क से जोड़ने का काम राज्य सरकार अपनी अन्य योजनाओं के माध्यम से पूरा कर रही है।

