देहरादून। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी नीट पेपर लीक विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बीच सुधार के कई दावे कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है। केंद्रीय कैबिनेट ने साल 2017 में NTA के गठन की मंजूरी देते समय परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से खुद के 500 परीक्षा केंद्र बनाने का प्रस्ताव पास किया था। हालांकि, करीब 9 साल बीत जाने के बाद भी एजेंसी अपना एक भी सेंटर नहीं बना सकी है और आज भी पूरी तरह किराए के सेंटरों पर निर्भर है।
कैबिनेट के कई बड़े फैसले आज तक कागजों तक सीमित हैं। एजेंसी ने हाल ही में ‘टेस्ट सेंटर नेटवर्क एंड ऑपरेशन अधिकारी’ का विज्ञापन निकाला है, जिसका काम मानक केंद्रों की तलाश करना होगा। यदि तहसील और जिला स्तर पर ग्रामीण इलाकों में कंप्यूटर आधारित NTA केंद्र बन गए होते, तो नीट-यूजी 2024 में धांधली और नीट 2026 में पेपर लीक जैसी नौबत नहीं आती। इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन समिति ने भी केंद्रों के निर्माण की सिफारिश की थी, जो दो सालों से फाइलों में दबी है।
NTA के अधूरेपन की सूची काफी लंबी है। महानिदेशक की सहायता के लिए नौ वर्टिकल, शासी मंडल और शिक्षाविद अध्यक्ष की नियुक्ति का प्रावधान भी अधूरा है। फीस से 250 क्षमता वाले परीक्षा भवन तैयार करने, ग्रामीण छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने और हिमाचल, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर के लिए मोबाइल टेस्ट सेंटर की योजनाएं ठप पड़ी हैं। इसके अलावा, सभी परीक्षाएं साल में दो बार ऑनलाइन मोड में कराने का नियम भी केवल जेईई मेन तक सिमट कर रह गया।
एक तरफ योजनाएं अटकी हैं, तो दूसरी तरफ NTA की कमाई में भारी उछाल आया है। वर्ष 2018 में गठन के समय सरकार ने एजेंसी को 25 करोड़ रुपये दिए थे। इसके बाद छात्रों से मिलने वाली आवेदन फीस के जरिए NTA की आय वर्ष 2019-20 में 504 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 1117 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
दूसरी ओर, परीक्षाओं में धांधली से जुड़े मामलों में CBI जांच का हाल भी चिंताजनक है। सीबीआई भर्ती परीक्षाओं से जुड़े 158 मामलों में जांच पूरी कर चुकी है, लेकिन अदालतों में सुनवाई शुरू नहीं हो पाई है। इनमें से कुछ मामले दो दशक से भी अधिक पुराने हैं। अब जांच एजेंसी इन्हें नए पेपर लीक रोधी कानून के तहत बनने वाले फास्ट ट्रैक कोर्ट में भेजने की तैयारी कर रही है।
अदालतों में लटके इन मामलों में अकेले दिल्ली में वर्ष 2000 से अब तक के 25 केस शामिल हैं, जिनमें AIIMS PG भर्ती, DU मेडिकल प्रवेश परीक्षा, 2004 CAT और 2013 SSC भर्ती शामिल हैं। इसके अलावा यूपी और पश्चिम बंगाल में 10-10, तमिलनाडु में 14, राजस्थान में 8, झारखंड-कर्नाटक में 5-5, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में 3-3, महाराष्ट्र में 3 तथा बिहार में नीट 2024 से जुड़े तीन समेत कुल पांच मामले सुनवाई के इंतजार में अटके हैं।

