देहरादून। मौसम के लगातार बदलते पैटर्न ने डेंगू के आउटब्रेक का खतरा बेहद बढ़ा दिया है, जिससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने जिले भर के 40 सरकारी और निजी अस्पतालों में कुल 1662 बेड आरक्षित करने का बड़ा फैसला लिया है। स्वास्थ्य प्रशासन के इस कदम का सीधा असर शहर के हर नागरिक पर पड़ेगा, ताकि डेंगू का लक्षण दिखते ही मरीजों को समय पर तत्काल इलाज मिल सके।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, आरक्षित किए गए कुल 1662 बेडों में से 1530 सामान्य वार्ड के बेड हैं, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों के लिए 132 आईसीयू बेड विशेष रूप से सुरक्षित किए गए हैं। जिले के सभी 40 चिन्हित सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि इमरजेंसी के समय किसी भी मरीज को बेड की किल्लत का सामना न करना पड़े।
जिले में डेंगू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब तक देहरादून जिले में 50 लोगों में डेंगू संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। पचास मामले सामने आने के बाद ही जिले का मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर एक्टिव मोड में आ गया है और अस्पतालों में विशेष डेंगू वार्ड तैयार कर दवाइयों और प्लेटलेट्स की व्यवस्था पुख्ता की जा रही है।
वहीं, डेंगू के बढ़ते खतरे पर जंतु वैज्ञानिकों ने भी बेहद चिंताजनक चेतावनी जारी की है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मौसम में हो रही रुक-रुक कर बारिश डेंगू के ‘एडीज’ मच्छरों के प्रजनन के लिए सबसे अनुकूल और मुफीद माहौल तैयार कर रही है। जब बारिश लगातार न होकर रुक-रुक कर होती है, तो नालियों, छतों और गमलों में पानी ठहर जाता है, जिससे मच्छरों के लारवा को पनपने का पूरा मौका मिलता है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती यही रुक-रुक कर होने वाली बारिश बनी हुई है, जो मच्छरों के कुनबे को तेजी से बढ़ा रही है। विभाग अब अस्पतालों में बेड रिजर्व करने के साथ-साथ आम जनता से भी लगातार अपील कर रहा है कि वे अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें। प्रशासन का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी ही इस बार डेंगू के प्रकोप को रोकने में सबसे असरदार हथियार साबित होगी।

