देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित भव्य ‘हिंदी दिवस समारोह’ की अध्यक्षता की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न साहित्यिक और रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं के 126 विजेता छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस समारोह का सीधा प्रभाव प्रदेश के युवाओं, साहित्यकारों और हिंदी प्रेमियों के बीच अपनी राजभाषा और क्षेत्रीय बोलियों के प्रति सम्मान बढ़ाने पर पड़ेगा।
हिंदी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 सितम्बर 1949 को संविधान सभा द्वारा संघ की राजभाषा स्वीकार की गई हिंदी ने देश में ‘विविधता में एकता’ को मजबूत किया है। उन्होंने प्रसिद्ध साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए बताया कि निज भाषा की उन्नति ही समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास का मूल आधार है।

आज के आधुनिक युग का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे में हिंदी को केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित न रखकर विज्ञान, अनुसंधान और डिजिटल दुनिया की एक मजबूत भाषा बनाना होगा। उन्होंने राज्य के युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक तकनीक का उपयोग हिंदी को वैश्विक मंचों पर नई पहचान दिलाने के लिए करें।
उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक विरासत का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’, चंद्रकुंवर बर्त्वाल और प्रसून जोशी जैसी महान विभूतियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि हिंदी के साथ-साथ गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी जैसी लोकभाषाएं हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं और राज्य सरकार इनके संरक्षण व संवर्धन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

साहित्यकारों और लेखकों को प्रोत्साहन देने की दिशा में मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के तहत जीवनभर साहित्य साधना करने वाले रचनाकारों को 5 लाख रुपये तथा ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को 5 लाख 51 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जा रही है।
इसके अलावा, ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के जरिए हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू सहित विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। सरकार अप्रकाशित रचनाओं के प्रकाशन हेतु आर्थिक अनुदान देने के साथ-साथ ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ जैसी सराहनीय पहलों से पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। भाषा संस्थान के माध्यम से प्रदेश के बिखरे हुए साहित्य का संग्रह और संरक्षण किया जा रहा है।

इस गरिमामयी समारोह में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, विधायक उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, भाषा विभाग के सचिव उमेश नारायण पांडे और भाषा निदेशक मायावती ढकरियाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, साहित्यकार और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

