एक फिलॉस्फी कहती है कि प्यार और जंग में जीत के लिए हर पैंतरा जायज है। ऐसे में चुनावी साल की ओर बढ़ते उत्तराखंड के सियासी गलियारे में भी हॉट टॉपिक ट्रेंड पर हैं। कांग्रेस इस बात से खफा है कि हरीश रावत के ओएसडी के घर दस साल बाद ईडी का छापा क्यों ?
हरिद्वार जिले के मंगलौर से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने ईडी की इस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताया और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। निजामुद्दीन ने कहा जनता के बुनिादी सवालों के जवाब डबल इंजन की सरकार के पास हैं नहीं। सारी शिक्षा व्यवस्था निजी हाथों में सौंपी जा रही है. ताकि गरीब के बच्चे को हाथ तालीम न लगे.जिन मसलों पर काम होना चाहिए उन पर सरकार काम नही कर रही जबकि विपक्ष को निशाना बनाए जा रही है।
काजी ने कहा चुनावी साल में ही भाजपा सरकार को ईडी की याद क्यों आई..अगर मामला 2016 का है तो फिर उस वक्त क्यों नहीं एक्शन लिया गया। काजी ने आरोप लगाते हुए कहा भाजपा के पास चुनाव में जनता के बीच जाने के लिए कोई मुद्दा नहीं है..सरकार हार से डरी हुई है इसलिए विपक्ष को निशाना बना रही है।
बेशक विपक्ष को वक्त को लेकर ऐतराज हो लेकिन सवाल तो बनता हैै आखिर एक ओएसडी के घर 36 लाख कैश, लग्जरी घड़ियां,और सोने के सिक्के कहां से आए. क्या किसी ओएसडी की इतनी पगार होती है कि वो इतना कुछ जमा कर दे। वक्त को लेकर ऐतराज हो सकता है माल को लेकर नहीं होना चाहिए
वैसे भी जिस दौर में मीठी चीनी के दाम आम आदमी के मुंह का स्वाद कड़वा कर रहे हों, अच्छे दिनो ने शक्ल न दिखाई हो उस दौर में एक मामूली ओएसडी के घर से माल आसबाब बरामद होना आम आदमी को ठेंगा दिखाने जैसा ही है। दौलत की बरामदगी मौजूदा राजनीतिक चरित्र के चेहरे का नकाब उठाती है।

