कुछ नाम ऐसे होते हैं जो अचानक से इंसान की पहचान बनते हैं । लेकिन वहीं नाम कुछ अर्सा गुजरता नहीं कि ,उस पर भारी पड़ जाते हैं। कोटद्वार के मोहम्मद दीपक को आप भूले नहीं होगे। हालांकि वो जन्म से दीपक मोहम्मद नहीं दीपक कश्यप थे।लेकिन अपने पड़ोसी दुकानदार को उत्पाती भीड़ से बचाने के चलते अचानक से मोहम्मद दीपक बन गए।
दीपक कश्यप को मोहम्मद सरनेम ने पूरे भारत में मशहूर कर दिया। उनको लेकर सोशल मी़डिया मे बहस भी छिड़ी बाकायदा दो गुट बन गए किसी ने उन्हें मसीहा करार दिया तो किसी ने धर्मद्रोही। लेकिन अब मोहम्मद दीपक के नाम फतवा जारी हुआ है।
फतवा उन्ही मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने जारी किया है । जो आल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष हैं और जिन्हे अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ दर्शन पर भी ऐतराज है। शाहबुद्दीन रजवी ने अभिनेत्री सारा अली की केदार यात्रा को नाजायज और हराम करार देते हुए इस पर माफी मांगने को कहा है।
बहरहाल दीपक कश्यप से मोहम्मद दीपक बने दीपक पर भी मौलान शहबुद्दीन रजवी ने फतवा जारी करते हुए कहा है कि गैर मुस्लिम का अपने नाम के आगे मोहम्मद लगाना नजायज है। रजवी ने तर्क देते हुए कहा है कि दीपक इस्लाम को नहीं मानते और कुरान पर नहीं चलते। लिहाजा शरीयत के मुताबिक उनका ऐसा करना नजायज है। रजवी ने कहा मोहम्मद पैगंबर साहब का मुकद्दस नाम है लिहाजा इसे गैर मुस्लिम इस्तमाल नहीं कर सकता।
खैर असल बात ये है कि दीपक कश्यप जो जोश मे आकर अपने नाम के आगे मोहम्मद लगा बैठे बरेली से फतवा जारी होने के बाद सोच रहे होंगे मैने जिनके लिए इंसानियत की पैरवी की वहीं तबका मेरी दिलेरी पर मेरा हौसला बढ़ाने के बजाए फतवा जारी कर फख्र महसूस कर रहा है। बेचारा दीपक फतवे के बाद अब न मौहम्मद रहा न कश्यप रहा ..न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम न इधर के हुए न उधर के हुए।
फ़तवा जारी होने के बाद सोशल मीडिया पर तमाम यूजर्स कमेंट कर रहे हैं जो दीपक को कश्यप से मोहम्मद बनने के लिए कोस रहे हैं। बेचारा दीपक न कश्यप रहा न मोहम्मद बना!

