उत्तराखंड: मदरसों में समान शिक्षा प्रणाली लागू, शुक्रवार की जगह अब रविवार को रहेगा साप्ताहिक अवकाश

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य के मदरसों और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और बड़ा बदलाव कर दिया है। राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक संस्थानों में समान शिक्षा प्रणाली लागू करने के उद्देश्य से विधानसभा में ‘अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक’ पेश कर दिया है। सरकार इस नई व्यवस्था को पहले ही अध्यादेश के माध्यम से राज्य में लागू कर चुकी थी, जिसे अब विधायी रूप दिया जा रहा है।

इस नए कानून के प्रभाव में आने के बाद अब उत्तराखंड के सभी मदरसों में पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के बजाय वही आधिकारिक पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जो प्रदेश के सामान्य सरकारी स्कूलों में लागू है। इसके साथ ही सरकार ने एक और बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए मदरसों में अब तक दी जाने वाली शुक्रवार की साप्ताहिक छुट्टी को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब प्रदेश के अन्य सभी शैक्षणिक संस्थानों की तर्ज पर मदरसों में भी केवल रविवार को ही साप्ताहिक अवकाश रहेगा।

यह भी पढ़ें -  हरिद्वार अर्धकुंभ के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, उत्तराखंड को मिलेगा 14,520 मीट्रिक टन अतिरिक्त राशन

राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा है कि नए नियमों और तय मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि नियमों के उल्लंघन के मामले में हरिद्वार जिले स्थित एक मदरसे के खिलाफ प्रशासन द्वारा पहले ही दंडात्मक कार्रवाई की जा चुकी है, जो यह दर्शाता है कि सरकार इन सुधारों को लेकर कितनी गंभीर है।

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग इस समय पूरे राज्य में संचालित हो रहे 190 मदरसों की मान्यता और उनके दस्तावेजों की गहन जांच कर रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस सत्यापन प्रक्रिया का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अब तक जांच में सही पाए गए 35 मदरसों को सरकार की ओर से आधिकारिक मान्यता प्रमाण पत्र भी जारी कर दिए गए हैं, जबकि बाकी संस्थानों की जांच अंतिम चरण में चल रही है।

यह भी पढ़ें -  बद्रीनाथ हेलीकॉप्टर क्रैश: हाथी पर्वत के पास सेना और SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर जारी

सरकार के इस फैसले को मुस्लिम समुदाय और प्रशासनिक हलकों दोनों तरफ से समर्थन मिल रहा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने राज्य सरकार के इस कदम का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे भी इसी देश का भविष्य हैं और उन्हें आधुनिक शिक्षा प्राप्त करने के मौलिक अधिकार से किसी भी स्थिति में दूर नहीं रखा जाना चाहिए।

वक्फ बोर्ड अध्यक्ष शादाब शम्स ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस नीतिगत पहल को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि मदरसों में आधुनिक ज्ञान, विज्ञान और गणित की शिक्षा मिलने से यहां के बच्चे भी भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक और प्रशासनिक अधिकारी बनकर देश व प्रदेश के विकास में अपनी अहम भूमिका निभा सकेंगे।

यह भी पढ़ें -  धनतेरस-दिवाली में उल्लू की बलि दी तो होगी जेल! उत्तराखंड STF की चेतावनी- 7 साल तक की होगी सजा

विधानसभा में संशोधन विधेयक पेश होने के बाद अब पूरे उत्तराखंड में अल्पसंख्यक शिक्षा का ढांचा पूरी तरह बदल जाएगा। सरकार के इस कदम से मदरसों में पढ़ने वाले हजारों छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा प्रणाली से जुड़ने का सीधा अवसर मिलेगा, जिससे उनके शैक्षणिक और बौद्धिक स्तर में व्यापक सुधार आने की उम्मीद है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नए नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। जो भी मदरसा बिना मान्यता या बिना निर्धारित पाठ्यक्रम के संचालित पाया जाएगा, उसकी मान्यता रद्द कर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।