देहरादून। दीपावली और धनतेरस के त्योहार पर धन प्राप्ति के अंधविश्वास में उल्लू की बलि देने और तंत्र-मंत्र के नाम पर वन्यजीवों का शिकार करने वालों पर उत्तराखंड एसटीएफ ने निगरानी बढ़ा दी है। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने बताया कि त्योहारों के दौरान वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी से जुड़े मामलों पर विशेष नजर रखी जा रही है। अंधविश्वास के नाम पर वन्यजीवों को नुकसान पहुँचाने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कानूनी रुख अपना रही है।
एसटीएफ की वाइल्डलाइफ यूनिट इस समय पूरी तरह से सक्रिय है और अवैध गतिविधियों में शामिल तस्करों व संदिग्ध लोगों की गोपनीय जानकारी जुटा रही है। एसटीएफ ने स्पष्ट किया है कि त्योहारों की आड़ में तांत्रिक क्रियाओं के लिए बेजुबान उल्लुओं या अन्य वन्यजीवों को निशाना बनाने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
कानूनी धाराओं की जानकारी देते हुए एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित जीवों का शिकार, तस्करी या उन्हें नुकसान पहुँचाना एक गंभीर अपराध है। इस तरह के मामलों में दोषी पाए जाने पर अपराध की प्रकृति के अनुसार 3 से 7 साल तक की कड़े कारावास की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि वे दीपावली पर धन प्राप्ति के लिए किसी भी तरह के भ्रम या अंधविश्वास के बहकावे में न आएं। उल्लू या किसी भी अन्य वन्यजीव की बलि देना या उनकी खरीद-फरोख्त करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। ऐसा करने वाले या इसमें सहयोग देने वाले लोग सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुँच सकते हैं।
पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने का आह्वान करते हुए कहा है कि यदि आसपास वन्यजीवों की तस्करी या शिकार से जुड़ी कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो उसकी सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को दें। आम जनता के सहयोग से ही इन बेजुबान वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी और तस्करों पर प्रभावी नकेल कसी जा सकेगी।

