उत्तराखंड के हजारों-हजार लोग दिल्ली में नौकरी करते हैं। वे हमेशा दीवाली और कुलदेवाता की पूजा में सम्मलित होने अपने गांव लौटते हैं।लेकिन इस बार उन्हें बग्वाली की छुट्टी मिल भी गई तो उन्हें अपने गांव पहुंचने के लिए काफी मशक्कत भी करनी होगी और जेब भी ज्यादा ढीली करनी होगी। उसकी वजह है दिल्ली सरकार का नया नियम। जिसके तहत दिल्ली में एक नवंबर से सिर्फ बीएस-6 वाहन ही प्रवेश कर पाएंगे।
ऐसे में उत्तराखंड परिवहन निगम की वोल्वो समेत करीब दो सौ बसों का संचालन प्रभावित होगा। जब बसे दिल्ली जाएंगी नहीं तो मुसाफिरों को दिल्ली से उत्तराखंड तक सफर के लिए तकलीफ उठानी पड़ेगी। जिसका सीधा फायदा निजी बस ऑपरेटर या टैक्सी वाहन सर्विस चलाने वालो को मिलेगा। तय है कि जिन कामगारों को पगार कम मिलती है उनकी दीपावली (बग्वाली) की छुट्टी गांव में परिजनो के साथ मनाने की हसरत अधूरी रह सकती है।
हालांकि उत्तराखंड परिवहन निगम ने वोल्वो और एसी बसों के फेरों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है। बताया जा रहा है कि निगम की 400 बसे हर रोज दिल्ली जाती हैं। रोडवेज प्रबंधन के अनुसार इनमें 12 वोल्वो समेत 200 बसें बीएस-छह नहीं हैं, इसके कारण वह दिल्ली नहीं जा सकेंगी। इसमें सबसे अधिक असर दिल्ली-देहरादून रूट पर वोल्वो की लग्जरी सेवा पर पड़ने की संभावना है, इस रूट पर 25 बसें संचालित होती हैं, जिनमें 12 बसें कम हो रही हैं।
अब परिवहन निगम शेष बसों के फेरों को बढ़ाकर इस कमी को पूरा करने की योजना बनाई है। रोडवेज महाप्रबंधक संचालन क्रांति सिंह ने बताया कि करीब दो सौ बसें हैं, जो नई दिल्ली नहीं जा सकेंगी। परिवहन निगम के पास सीएनजी दो बसें हैं, इसके अलावा पर्वतीय रूटों पर नई बसें हैं, जिनके होने से यात्रियों की सेवाओं पर असर नहीं पड़ेगा।
रही बात वोल्वो की तो उनके फेरों की संख्या को बढ़ाया जाएगा। अभी छह वोल्वो के फेरों को बढ़ाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर सभी 13 बसों के फेरे बढ़ाए जाएंगे, ऐसे में 26 सेवाएं जो जाएंगी। हालांकि उत्तराखड परिवहन निगम की माने तो उसका पूरा प्रयास रहेगा कि यात्रियों को कोई दिक्कत न हो।
उधर नए नियम के तहत दिल्ली रूट से बेदखल हुई निगम की बसें और वोल्वो को आगरा, लखनऊ, चंडीगढ़ समेत अन्य रूटों पर संचालित करने की योजना बनाई जा रही है। इसमें नेपाल का रूट भी शामिल है। इससे संबंधित जगहों पर यात्रियों को वोल्वो बस का विकल्प मिल सकेगा।

