झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर 24 दिनों से जारी छात्र आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया गया। इसके साथ ही टीडीपीएल एजेंसी द्वारा वर्ष 2014 से अब तक आयोजित सभी 15 भर्ती परीक्षाएं, उनके परिणाम और चयन प्रक्रिया पूरी तरह निरस्त कर दी गई है। इस फैसले से 6.50 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं।
इन 12 सालों की भर्ती परीक्षाओं को निरस्त किए जाने के बाद JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा, संयुक्त सिविल सेवा बैकलाग परीक्षा-2023, संयुक्त सिविल सेवा बैकलाग परीक्षा-2025, झारखंड पात्रता परीक्षा, वन क्षेत्र पदाधिकारी भर्ती परीक्षा और टीडीपीएल द्वारा वर्ष 2014 से आयोजित अन्य सभी 15 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं।
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि 2014 से अब तक हुई सभी छोटी-बड़ी गड़बड़ियों की व्यापक जांच की जाएगी और एसआईटी व सीआईडी की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसके तहत गलत तरीके से नियुक्त लोग अब अन्य परीक्षाओं में हुई धांधली के आरोपों में भी गिरफ्तार हो रहे हैं।
भविष्य में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का ऐलान किया है। यह समिति राज्य में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और मजबूत बनाने के उपाय सुझाएगी। इसके अलावा, केंद्र सरकार के खान और खनिज (विकास और विनिमय) अधिनियम संशोधनों पर चर्चा के लिए जल्द विशेष बैठक या विधानसभा सत्र बुलाया जा सकता है।
24 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों ने परीक्षाएं रद्द होने पर खुशी जताई है, लेकिन स्पष्ट किया है कि जब तक पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग पूरी नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। 12 सालों का परिणाम रद्द होने से जहां एक तरफ धांधली के खिलाफ छात्रों की जीत हुई है, वहीं कई चयनित उम्मीदवारों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

