कभी इन्वेस्टर्स समिट तो कभी अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई… अमित शाह के भाषण में बार-बार गूंजा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम, साफ दिखा केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा
देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्य स्थापना दिवस के उत्सव को भाजपा के लिए सियासी ऊर्जा के बड़े मंच में तब्दील कर दिया। एक तरफ उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जमकर पीठ थपथपाई तो दूसरी तरफ आगामी विधानसभा चुनाव के लिए 65 पार सीटों का लक्ष्य निर्धारित कर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी। अमित शाह के दौरे का संदेश साफ था कि भाजपा उत्तराखंड में अगले चुनाव को लेकर अभी से कमर कस चुकी है और इस सियासी रणनीति के केंद्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ही हैं।
अमित शाह के संबोधन को गौर से सुनने वालों ने एक बात जरूर महसूस की कि केंद्रीय गृहमंत्री के भाषण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम बार-बार आता रहा। यह महज औपचारिक राजनीतिक शिष्टाचार नहीं था, बल्कि धामी सरकार के कामकाज और नेतृत्व पर केंद्रीय नेतृत्व के भरोसे की शानदार मुहर थी।
कभी निवेश के मोर्चे पर धामी सरकार की तारीफ हुई तो कभी सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के अभियान को लेकर मुख्यमंत्री की पीठ थपथपाई गई। यानी अमित शाह ने मंच से धामी सरकार के कामों की ऐसी मार्केटिंग की कि भाजपा कार्यकर्ताओं को भी आगामी चुनाव के लिए नया जोश मिल गया।
दरअसल, उत्तराखंड में इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन से लेकर निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की दिशा में मुख्यमंत्री धामी ने जिस तरह सक्रियता दिखाई, उसका जिक्र अमित शाह के संबोधन में खास तौर पर सुनाई दिया। निवेश और विकास को लेकर राज्य सरकार की कोशिशों को केंद्रीय नेतृत्व की सराहना मिलना धामी के लिए राजनीतिक तौर पर भी अहम माना जा रहा है। वहीं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ चलाए गए अभियान का जिक्र कर अमित शाह ने यह भी संकेत दिया कि सरकार के सख्त फैसलों को दिल्ली का पूरा समर्थन हासिल है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि अमित शाह ने केवल सरकार की उपलब्धियों का बखान नहीं किया, बल्कि मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व को भी राजनीतिक रूप से मजबूती देने का काम किया। राज्य की राजनीति में अक्सर मुख्यमंत्री की कुर्सी और नेतृत्व को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चलती रहती हैं, लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री के मंच से मिली इस खुली तारीफ ने उन तमाम अटकलों को पीछे छोड़ने का काम किया है।
धामी की पीठ थपथपाकर शाह ने यह संदेश देने की कोशिश की कि प्रदेश में भाजपा की चुनावी रणनीति में मुख्यमंत्री की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है। वहीं अमित शाह ने आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए 65 से अधिक सीटों पर जीत का लक्ष्य रखकर साफ कर दिया कि पार्टी केवल सत्ता बचाने की तैयारी नहीं कर रही, बल्कि पहले से बड़ा जनादेश हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है।
यह लक्ष्य जितना बड़ा है, उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री धामी और प्रदेश भाजपा संगठन के कंधों पर आ गई है। 70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड में 65 पार का नारा अपने आप में राजनीतिक महत्वाकांक्षा का बड़ा संकेत है। अमित शाह का यह दौरा भाजपा संगठन के भीतर उत्साह बढ़ाने वाला तो रहा ही, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के राजनीतिक कद को भी नई मजबूती देता दिखाई दिया।
धामी के कामों की केंद्रीय मंच से तारीफ, बार-बार नाम का उल्लेख और फिर 65 पार का चुनावी लक्ष्य… इन तीनों बातों को एक साथ जोड़कर देखें तो तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आती है। कुल मिलाकर अमित शाह देवभूमि से सिर्फ स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देकर नहीं लौटे, बल्कि धामी सरकार के कामकाज पर केंद्रीय नेतृत्व की मुहर लगाकर गए।
संदेश भी ऐसा कि धामी सिर्फ प्रदेश में धाकड़ अंदाज में सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि दिल्ली के बड़े नेताओं के भरोसेमंद चेहरे के रूप में भी अपनी जगह मजबूत कर चुके हैं। अब देखना यह होगा कि धामी की यह राजनीतिक धार 65 पार के लक्ष्य को कितनी दूर तक ले जाती है।

