उत्तराखंड में ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’ का आगाज: 2 महीने तक चलेगा जागरूकता अभियान, किसानों को मिलेंगे उन्नत बीज

ख़बर शेयर करें

देहरादून। उत्तराखंड में जल संरक्षण, कृषि विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए जलागम विभाग ने दो महीने तक चलने वाले प्रदेशव्यापी ‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’ का विधिवत शुभारंभ कर दिया है। जलागम मंत्री राम सिंह कैड़ा ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ जल और कृषि संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

इस दो महीने लंबे अभियान के दौरान प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके तहत किसानों को उन्नत बीज वितरित किए जाएंगे, जरूरत मंद लाभार्थियों को सहायता दी जाएगी तथा जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के साथ विशेष गोष्ठियां व जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। इन सबका मकसद ग्रामीण इलाकों में टिकाऊ कृषि और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए लोगों को प्रेरित करना है।

यह भी पढ़ें -  पौड़ी: होटल के NOC की एवज में मांगी ₹20,000 की घूस, प्रभारी अग्निशमन अधिकारी रंगे हाथों गिरफ्तार

‘जल-कृषि समृद्धि अभियान’ के दायरे में राज्य की कई प्रमुख योजनाओं को शामिल किया गया है। इसमें उत्तराखंड जलवायु अनुकूल बारानी कृषि परियोजना, ग्रीन एजी परियोजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवनेशन अथॉरिटी की गतिविधियां प्रमुख रूप से शामिल हैं, जो मिलकर ग्रामीण आर्थिकी को मजबूत करेंगी।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड गौरव सम्मान 2026: पूर्व CM भुवन चंद्र खंडूड़ी समेत 15 विभूतियों को मिलेगा 'उत्तराखंड गौरव सम्मान'

इस अभियान की शुरुआत राज्य के पिथौरागढ़ और हरिद्वार जनपदों से हो चुकी है। पिथौरागढ़ के यक्षवती नदी क्षेत्र में एक भव्य ‘नदी उत्सव’ का आयोजन किया गया, जिसमें जनजागरूकता गतिविधियों, दिया दान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को नदियों के संरक्षण का संदेश दिया गया।

यह भी पढ़ें -  गृह मंत्री अमित शाह के दौरे पर हरीश रावत ने कसा तंज, कहा- 'जनता के लिए नहीं, बीजेपी के लिए दौरा'

दूसरी ओर, हरिद्वार की पीली पड़ाव ग्राम पंचायत में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को जलवायु अनुकूल बारानी कृषि के तहत धान की सीधी बुवाई, गोबर गैस संयंत्र लगाने और अन्य आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। आने वाले दो महीनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी ऐसे ही जागरूकता शिविर लगाकर किसानों को सशक्त बनाने का कार्य किया जाएगा।