भारतीय सामानों का दुनिया में बजेगा डंका, 2030 तक 570 जिले बनेंगे एक्सपोर्ट हब

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देहरादून। वैश्विक बाजारों में भारतीय सामानों की पहुंच बढ़ाने और नए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक देश के 570 जिलों को नए ‘निर्यात हब’ के रूप में विकसित करने का बड़ा फैसला किया है। नई दिल्ली में वाणिज्य मंत्रालय द्वारा तैयार इस योजना से सीधे जिला स्तर के छोटे उत्पादकों, एमएसएमई इकाइयों और स्थानीय कारीगरों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेगा।

सरकार की इस योजना के तहत नए और उभरते निर्यातकों को ई-कॉमर्स एक्सपोर्ट प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। इस कदम से स्थानीय स्तर पर बनने वाले अनोखे और पारंपरिक उत्पादों की ग्लोबल बिक्री बढ़ेगी, जिससे छोटे व्यापारियों की सीधी पहुंच दुनिया भर के प्रमुख बाजारों तक हो जाएगी।

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योजना के पहले चरण में उत्तर प्रदेश के 12 प्रमुख जिलों को एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने के लिए चुना गया है। इनमें मेरठ, गोरखपुर, कानपुर, लखनऊ, भदोही, फिरोजाबाद, गौतमबुद्धनगर, मिर्जापुर, मुरादाबाद, आगरा, सहारनपुर और वाराणसी शामिल हैं। इन जिलों में स्थानीय निर्यातकों की संख्या बढ़ाने का काम शुरू कर दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश की तर्ज पर ही अन्य राज्यों के जिलों को भी चिह्नित कर निर्यात केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत हर जिले के पहचान बन चुके ‘एक जिला, एक उत्पाद’और पारंपरिक हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए मिशन मोड में काम चल रहा है।

इस मुहिम में कृषि उत्पाद, जीआई टैग सामान, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर विशेष फोकस रहेगा। निर्यात बढ़ाने के लिए स्थानीय उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय पैकेजिंग, गुणवत्ता सुधार, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, टेस्टिंग लैब और ग्लोबल मार्केटिंग की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

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उत्तर प्रदेश की ओडीओपी योजना को केंद्र की जिला-आधारित निर्यात रणनीति से जोड़ा जा रहा है। हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में हुई व्यापार परिषद की बैठक में इस पूरी रणनीति पर मुहर लगाई गई, ताकि एमएसएमई क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर देश की समग्र निर्यात क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया जा सके।

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