सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम सांख्यिकीय रिपोर्ट-2024 के आंकड़ों ने उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की एक विरोधाभासी तस्वीर पेश की है, जिससे साफ होता है कि राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में तो उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन जीवन के अंतिम समय में चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में जन्म दर लगातार घट रही है, जो वर्ष 2019 में 17.1 प्रति हजार थी और अब वर्ष 2024 में घटकर 16.7 प्रति हजार रह गई है, जबकि मृत्यु दर स्थिर बनी हुई है। राहत की बात यह है कि राज्य में प्रसव के दौरान 94.8% महिलाओं को संस्थागत चिकित्सा सुविधा मिल रही है, जिसमें से 57.1% प्रसव सरकारी अस्पतालों में और 37.7% निजी अस्पतालों में होते हैं।
इसके विपरीत, स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि राज्य में 46.5% लोग ऐसे हैं जिन्हें मृत्यु के समय अस्पताल तक पहुंचने की सुविधा ही नहीं मिल पाती और कई लोग घर पर या अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल न पहुंच पाने वालों का यह आंकड़ा 48.4% और शहरी क्षेत्रों में 40.1% है।
रिपोर्ट दर्शाती है कि राज्य में केवल 39.4% लोगों को ही जीवन के अंतिम क्षणों में अस्पताल में उचित इलाज नसीब हो पाता है, जबकि 14.3% लोगों का इलाज अस्पताल से इतर होता है। इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग के पूर्व निदेशक डॉ. एलएम उप्रेती का कहना है कि कुछ लोग अपनी चौखट पर ही प्राण त्यागने की इच्छा रखते हैं, जिस वजह से भी वे अंतिम समय में अस्पताल नहीं जाते हैं।

