जलवायु परिवर्तन का असर: हिमालय के वन्यजीव गर्मी से बचने के लिए ऊंची चोटियों की ओर पलायन

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हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव अब वहां के वन्यजीवों पर साफ दिखाई देने लगा है। निचले इलाकों में रहने वाले जानवर अब ठंडक की तलाश में पहाड़ों की अधिक ऊंचाइयों की ओर रुख कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण दुर्लभ ‘हिमालयन बीजल’ है, जो आमतौर पर 1500 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है, लेकिन हाल ही में इसे पहली बार लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में हो रही बढ़ोतरी के कारण ये जीव अपने प्राकृतिक आवास छोड़कर नए और ठंडे ठिकानों की तलाश कर रहे हैं, जो हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है।

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दुर्लभ हिमालयन बीजल का ऊंचाई पर दिखना

हिमालयन बीजल एक छोटा और बेहद फुर्तीला मांसाहारी स्तनपायी जीव है जो मुख्य रूप से चट्टानी इलाकों और घने जंगलों में रहना पसंद करता है। वन विभाग की रिसर्च के अनुसार, यह जीव 10 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान में रहना पसंद करता है, लेकिन निचले हिस्सों में गर्मी बढ़ने के कारण अब यह शून्य से भी कम तापमान वाले इलाकों में पहुंच गया है। नीलंग वैली जैसे क्षेत्रों में, जहां मार्च-अप्रैल में भी बर्फबारी होती है, वहां इस जीव की मौजूदगी दर्ज की गई है, जो चूहों और अन्य छोटे जीवों का शिकार कर प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

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हाथी और बाघ जैसे बड़े जानवरों का बदलता ठिकाना

केवल छोटे जीव ही नहीं, बल्कि बाघ और हाथी जैसे बड़े वन्यजीव भी अब ठंडे इलाकों की तलाश में ऊंचाइयों पर चढ़ रहे हैं। मार्च के महीने में बागेश्वर की सुंदरढूंगा ग्लेशियर वैली में एक बाघ को 3000 मीटर की ऊंचाई पर कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड किया गया, जहां का तापमान गर्मियों में भी बहुत कम रहता है। इसी तरह केदारनाथ वन्यजीव अभयारण्य और रामनगर के साल्ट क्षेत्र में भी हाथियों को पहाड़ों पर चढ़ते हुए देखा गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि बढ़ते तापमान की वजह से कई वन्यजीव मजबूरी में अपने पुराने आवास बदल रहे हैं।