देहरादून के डांडा लखौंड स्थित एटीएस कॉलोनी के पीछे एक आम के बगीचे में हुए संदिग्ध पेड़ कटान ने अब बड़े विवाद का रूप ले लिया है। अनुमति केवल दो पेड़ों को काटने की ली गई थी, लेकिन मौके पर भारी मात्रा में लकड़ी की निकासी को देखते हुए बड़े पैमाने पर अवैध कटान की आशंका जताई जा रही है। वन मंत्री सुबोध उनियाल के कड़े रुख के बाद वन विभाग ने इस मामले में सक्रियता दिखाई है और शुक्रवार को मसूरी वन प्रभाग के उच्चाधिकारियों व रायपुर रेंज की टीम ने घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। विभाग अब इस बात की गहराई से पड़ताल कर रहा है कि क्या अनुमति की आड़ में नियमों को ताक पर रखकर हरियाली को नुकसान पहुंचाया गया है।
नियमों का उल्लंघन और कानूनी कार्रवाई का खतरा
इस पूरे प्रकरण में वन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच के दौरान अनुमति से अधिक पेड़ों के कटान या लकड़ी की अवैध निकासी की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र के भीतर फलदार पेड़ों के कटान के लिए वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है, और इस मामले में कागजी दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच का अंतर ही जांच का मुख्य बिंदु बना हुआ है।
विवाद के पीछे की संभावित वजहें
वन विभाग की प्रारंभिक जांच और स्थानीय सूत्रों के संकेतों से यह बात भी उभरकर सामने आ रही है कि इस मामले के पीछे सिर्फ पर्यावरण का नुकसान ही नहीं, बल्कि कुछ स्थानीय जमीनी विवाद भी जुड़े हो सकते हैं। विभाग इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है ताकि यह साफ हो सके कि यह वास्तव में केवल एक नियम विरुद्ध कटान का मामला है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है। फिलहाल, क्षेत्र में वन विभाग की इस सख्त कार्रवाई ने लकड़ी माफियाओं और नियमों की अनदेखी करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

