मई का महीना UJVNL हो या UPCL दोनो का इम्तिहान ले रहा है। मई होने के बावजूद भी नदियों का जल स्तर उतना नहीं बढ़ा जितने की UJVNL को दरकार है। नतीजा ये है कि राज्य में बिजली बनाने की रफ्तार धीमी हो गई है। जिसका सीधा असर डिमांड और सप्लाई पर पड़ रहा है। राज्य में हर दिन साढ़े चार करोड़ यूनिट से ज्यादा बिजली की खपत है जबकि आलम ये है कि राज्य पूल और केंद्रीय पूल मिलाकर 3.1 करोड़ यूनिट का ही इंतजाम हो पा रहा है।
ऐसे में बिजली का इंतजाम करने के लिए UPCL को बाजार से 1.3 करोड़ यूनिट बिजली खरीदनी पड़ रही है। जबकि हिमालय की गोद में आबाद उत्तराखंड को गंगा-यमुना, अलंकनंदा भागीरथी पिंडर मंदाकिनी जैसी तमाम नदियों का मायका माना जाता है।बावजूद इसके UJVNL की टरबाइन सुस्त पड़ी हुई हैं। उसकी वजह है मई महीने में तापमान की गिरावट। इस बार मई माह मे उतनी गरमी नहीं है जितना टेंपरेचर ग्लेशियर्स को पिघलाने के लिए जरूरी हैं।
लिहाजा गिलेशियर्स के पिघलने की रफ्तार धीमी है तो नदियों की रफ्तार और जलस्तर दोनो सुस्त हैं। आलम ये है कि आजकल UJVNL सिर्फ 1.2 करोड़ यूनिट बिजली ही बना पा रहा है जबकि मई माह में बिजली उत्पादन 2 करोड़ यूनिट से ज्यादा का होता था। लेकिन इस बार मौसम का मिज़ाज बदला हुआ है मई माह में भी बर्फबारी हो रही है। हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि मई माह के दूसरे पखवाड़े में गर्मी बढ़ते ही बिजली उत्पादन के हालत सुधर जाएंगे।

